हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हिंदी प्रोत्साहन समिति के तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन श्रेष्ठ कविताओं के साथ संपन्न हुआ ।
मां भारती पब्लिक स्कूल के प्रांगण में आयोजित इस कवि सम्मेलन में समाज में कुछ विशिष्ट कार्य व समाज सेवा हेतु चार समाजसेवियों लाखों लोगों को गंगा स्नान करने वाले सूर्य प्रताप सिंह सूरज भैया, रामायणी सम्मान से सम्मानित आचार्य हरिओम जी, सशक्त बेटी सुंदर समाज के संस्थापक उदय पुंढीर एवं पुरदिलनगर से अमरनाथ तक की पैदल यात्रा करने वाले दिनेश शर्मा स्नेही का सम्मान किया गया । वहीं नगर के कुछ संभ्रांत परिवारों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में कवियों को सम्मान प्रदान किये।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छवि चित्र पर माल्यार्पण कर विशिष्ट अतिथियों ने किया।
वृंदावन से पधारी कवयित्री रेनू उपाध्याय ब्रजराज की उत्तम सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
नवोदित कवयित्री शांभवी पाठक दर्पण ने पढ़ा- "मंदिर बनाकर कैद फिर ईश्वर को कर दिया ,अब खुद गुनाह करने को आजाद हो गए। श्रीमती रैणु उपाध्याय ने पढ़ा -" " यह हिंदुस्तान की भाषा हमें प्राणों से प्यारी है।
कार्यक्रम का प्रारंभिक संचालन हिंदी प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र दीक्षित शूल ने किया। तत्पश्चात देश के जाने-माने संचालक डॉ सुरेंद्र सार्थक डीग राजस्थान ने संभाला और पढ़ा- " भाषा के सागर में गंगा है हिंदी । हमारे लिए तो तिरंगा है हिंदी।
उज्जैन मध्य प्रदेश से पधारे युवा गीतकार कुमार संभव ने पढ़ा- " प्यार का व्याकरण पूज्य घनश्याम हैं। भूमिका भावना मूल्य घनश्याम हैं। कामिनी ने मदन से यह कह दिया,
राधिका के बिना शून्य घनश्याम हैं।
दिल्ली से पधारे वरिष्ठ नव गीतकार डॉ राधेश्याम बंधु ने पढ़ा- सच का साथी कौन है, सब झूंठों के साथ। झूंठे रबड़ी खा रहे सच के खाली हाथ।
कवयित्री सीमा पुंढीर ने पढ़ा- " हमारी आन है हिंदी हमारी शान है हिंदी। दिलों में झांक कर देखो तो हिंदुस्तान है हिंदी।
हास्य-व्यंग्य कवि राम राहुल टूंडला ने हंसाते हसाते श्रोताओं को लोटपोट कर दिया और स्त्रियों द्वारा पतियों की हत्या पर पढ़ा- " खतरों का सायरन मुझे सुनाई देता है। बकरे को ज्यों दिखाई बस कसाई देता है।
फरीदाबाद हरियाणा के प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि श्री यशदीप कौशिक ने एक से एक चुटीले व्यंग्य पढ़ खूब बाह बाही लूटी। सुरेंद्र सार्थक की दाना मांझी वाली मार्मिक कविता पर श्रोता की आंखें छलक उठीं।
समिति के संस्थापक देवेंद्र दीक्षित शूल ने पढ़ा- जिनने अत्याचार किए थे उनकी संस्कृति ना अपनाएं।
छोड़ विदेशी भाषाओं को अपनी हिंदी को अपनाएं।
वहीं धांसू खैरवी ने खूब हसाया और स्थानीय कवि प्रमोद विषधर की कविताओं ने भी खूब रंग जमाया।
सैकड़ो श्रोताओं ने कई घंटे तक श्रेष्ठ कविताओं का तालियों की गड़बड़हट के साथ खूब सुना।
कवि सम्मेलन में राजेंद्र मोहन सक्सैना कार्यक्रम अध्यक्ष , बार के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गौरीशंकर गुप्ता नोटरी , पूर्व चेयरमैन गिरीश मोहन गुप्ता, डाॅ शरीफ अली ,अमित मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रविकांत यादव , सीपीएस बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या श्रीमती शालिनी गर्ग, भाजपा मंडल अध्यक्ष मुकुल गुप्ता, समाज सेवी दिलीप गुप्ता, कुमुद कांत गर्ग, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सक्सेना, सत्य प्रकाश शर्मा भैंकुरी, पवन माहेश्वरी बौहरे , राजशेखर प्रधान, पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह चौहान, राधेकांत सक्सैना, प्रदीप मुद्गल, मनोज शर्मा ,जयप्रकाश गौड प्रवक्ता, एसएन भारद्वाज प्रवक्ता, हिंदी प्रवक्ता चरण सिंह, समीक्षक श्रीकांत गर्ग, जीवन आयुर्वेद के विपिन चौहान, प्रो अर्थ आयुर्वेदा प्रा लिमिटेड के सुपरवाइजर अमरीष शर्मा, डॉ शिवेन्दु दीक्षित, मनोज राजोरिया आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय है ।
वहीं कवियों का सम्मान मां भारती पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक हरीश मोहन वार्ष्णेय, कुनाल वार्ष्णेय, पियूष वार्ष्णेय आदि ने किया ।
वहीं कवयित्रियों का सम्मान मनीषा वार्ष्णेय, प्रीती वार्ष्णेय मालती गर्ग व शालिनी गर्ग, सीमा मुद्गल, विद्यालय की अध्यापिकाओं तथा डाॅ प्रदीप गर्ग की पत्नी रेनू गर्ग आदि ने किया।
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