जनपदवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी ने जिला चिकित्सालय एवं महिला चिकित्सालय का किया निरीक्षण
हाथरस।
जनपदवासियों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी अतुल वत्स ने पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के साथ जिला चिकित्सालय एवं जिला महिला चिकित्सालय, हाथरस का भ्रमण कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने जिला महिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. प्रवीण भारती एवं डॉ. अनूप शर्मा से गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन की संख्या बढ़ाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने संबंधित चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ से सिजेरियन ऑपरेशन बढ़ाने में आने वाली समस्याओं की जानकारी भी प्राप्त की।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऐसी गर्भवती महिलाएं, जिनके पिछले गर्भ के दौरान अथवा वर्तमान गर्भावस्था में ऐसी चिकित्सकीय बीमारी या जटिलता हो, जिसके कारण सिजेरियन ऑपरेशन आवश्यक हो, उन्हें महिला चिकित्सक की जांच अथवा अल्ट्रासाउंड के माध्यम से गर्भावस्था के आठवें माह में ही चिन्हित किया जाए। ऐसी महिलाओं की सूची स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा तैयार कर उन्हें समय से सिजेरियन प्रसव के लिए आवश्यक जानकारी एवं परामर्श उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका प्रसव जिला महिला चिकित्सालय में ही सुरक्षित रूप से कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने जिला महिला चिकित्सालय में 100 सिजेरियन ऑपरेशन कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निजी क्षेत्र के 3 महिला रोग विशेषज्ञों को आनकाल व्यवस्था के आधार पर अनुबंधित किया गया है। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रत्येक सिजेरियन ऑपरेशन के लिए 4,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
इसके उपरांत जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन 50 शय्यायुक्त क्रिटिकल केयर यूनिट का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। मुख्य चिकित्साधिकारी ने अवगत कराया कि क्रिटिकल केयर यूनिट के संचालित होने के उपरांत यहां भी सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा प्रारंभ की जाएगी। इससे महिला चिकित्सालय में सीमित वार्ड क्षमता की समस्या का समाधान होने के साथ ही अधिक संख्या में गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन एवं बेहतर चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।
तत्पश्चात जिलाधिकारी ने जिला चिकित्सालय के नवीन संचालित इमरजेंसी ब्लॉक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने भर्ती मरीजों एवं उनके तीमारदारों से बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने लगभग 18 माह के भर्ती बच्चे आर्यन की मां से भी बातचीत की। बच्चे की मां ने बताया कि उसके बच्चे में खून की अत्यधिक कमी है तथा निजी चिकित्सक द्वारा उपचार के लिए काफी धनराशि मांगी गई थी, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह निजी अस्पताल में उपचार कराने में सक्षम नहीं थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि बच्चे को फ्रेश ब्लड की आवश्यकता है। इस पर जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक से किसी रक्तदाता की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया। पुलिस अधीक्षक के सहयोग से कुछ ही समय में रक्तदाता की व्यवस्था कर बच्चे को एक यूनिट रक्त उपलब्ध कराया गया।
अन्य भर्ती मरीजों एवं उनके तीमारदारों ने भी जिला चिकित्सालय में उपलब्ध कराई जा रही इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संतोष व्यक्त किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इमरजेंसी भवन के पीछे जलभराव की समस्या का संज्ञान लेते हुए इसके स्थायी समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी (राजस्व एवं वित्त) को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जिला अस्पताल के मुख्य द्वार से इमरजेंसी ब्लॉक तक सड़क का निर्माण कराए जाने के भी निर्देश दिए, जिससे मरीजों एवं उनके तीमारदारों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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