उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लि द्वारा लघु एवं सीमांत कृषकों के हितार्थ संचालित मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के शुभारंभ के अवसर पर जनपद हाथरस में रामोजी रिसोर्ट, अलीगढ़ रोड पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि की अध्यक्षता एवं विधायक सिकंदराराऊ वीरेन्द्र सिंह राणा, जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाह, जिलाधिकारी सत्य प्रकाश पटेल तथा मुख्य विकास अधिकारी पीएन दीक्षित की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना संबंधी पोर्टल का शुभारंभ मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ से बटन दबाकर किया गया। जनपद स्तर पर कार्यक्रम का सजीव प्रसारण रामोजी रिसोर्ट में किया गया। इस अवसर पर सांसद, विधायक सिकंदराराऊ, जिलाध्यक्ष, सांसद प्रतिनिधि, निदेशक सहकारिता समिति, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, सहित संबंधित अधिकारी/कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कृषकों ने मुख्यमंत्री जी का उद्बोधन सुना तथा योजना पर आधारित लघु फिल्म का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के शुभारंभ अवसर पर कार्यक्रम संयोजक एवं निदेशक, यू.पी.सी.बी. भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा कृषकों को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए सहकारिता को आधार बनाया गया है। उन्होंने इसके लिए हाथरस की धरती से मुख्यमंत्री जी का हृदय से आभार एवं अभिनंदन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़ करने तथा सहकारी संस्थाओं को पुनः सक्रिय एवं मजबूत बनाने की दिशा में सरकार द्वारा महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के प्रति विश्वास का वातावरण तैयार हुआ है तथा सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास एवं कार्य करने के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए समितियों एवं सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और प्रमाणिकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों एवं सहकारी समितियों से जुड़े पदाधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए और ऋण वितरण में पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में कुछ मामलों में कृषि एवं अन्य गतिविधियों के लिए ऋण वितरण के बाद उसका अपेक्षित उपयोग मौके पर दिखाई नहीं देता था। इसलिए अब ऋण वितरण की प्रक्रिया को अधिक प्रमाणिक एवं पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है, ताकि जिस उद्देश्य के लिए ऋण स्वीकृत किया गया है, उसका वास्तविक लाभ लाभार्थी को मिल सके।
कार्यक्रम संयोजक ने कहा कि मुख्यमंत्री जी द्वारा किसानों के हित में भूमि विकास बैंक के माध्यम से दीर्घकालीन अवधि के लिए ऋण वितरण की महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने कहा कि सहकारिता से जुड़ी सभी संस्थाओं को चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने के लिए शासन स्तर से हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने सहकारी समितियों एवं संस्थाओं के अध्यक्षों तथा पदाधिकारियों से अपील की कि जहां कहीं भी कोई कमी या समस्या हो, वहां संबंधित अधिकारियों से निरंतर समन्वय स्थापित कर उसका समाधान कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सहकारिता से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयास से सहकारी संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने में सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों एवं आमजन को योजनाओं का पारदर्शी ढंग से लाभ दिलाने के लिए सभी संबंधित लोग अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें।
ए0आर0 कोऑपरेटिव राकेश शंकर श्रीवास्तव ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का उद्देश्य लघु एवं सीमांत कृषकों को कृषि, कृषि आधारित गतिविधियों तथा अकृषि क्षेत्र में आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के अंतर्गत पात्र लघु एवं सीमांत कृषक, जो पूर्व से ऋणी सदस्य हैं तथा जिनकी ऋण अदायगी नियमित है, उन्हें 06 प्रतिशत की प्रभावी रियायती वार्षिक ब्याज दर पर 06 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। ऋण की अवधि 05 वर्ष एवं उससे अधिक होगी। उन्होंने बताया कि ऋण की किस्तों का समय से भुगतान करने वाले लाभार्थियों को राज्य सरकार द्वारा ब्याज अनुदान का लाभ प्रदान किया जाएगा। योजना के अंतर्गत ऋण की अदायगी आसान किस्तों में की जा सकेगी। साथ ही, ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सुगम एवं सरल बनाया गया है। योजना के माध्यम से कृषकों को कृषि कार्यों के साथ-साथ कृषि आधारित अन्य गतिविधियों एवं अकृषि क्षेत्र से संबंधित आवश्यकताओं के लिए भी ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के शुभारंभ से जनपद के लघु एवं सीमांत कृषकों को वित्तीय सहायता प्राप्त होने के साथ ही उनकी आय एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
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