राष्ट्रसंत परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज को आज सकल जैन समाज द्वारा श्री चन्द्र प्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर पर सामूहिक रूप से विनयांजलि अर्पित की गई । जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज 18 फरवरी को ब्रह्मलीन हो गए थे और उनकी दिव्य आत्मा ने चंद्रगिरी जैन तीर्थ में देह त्याग दी। इस महान आत्मा की पुण्यतिथि पर देशभर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के सम्मान में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की विशेष पूजा और स्मृतियों के अवसर पर एक साथ विनयांजलि समर्पित की गई।
आचार्य विद्यासागर महाराज को विनयांजलि अर्पित करते हुए समाज के लोगों ने गुरुवर के प्रति कृतज्ञ भाव व्यक्त किया। शुभारंभ में भावना पाठ और समाधी भावना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके पश्चात् आचार्य श्री का पूजन कर सर्व समाज, संगठन एवं उपस्थित जन समुदाय द्वारा दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
विनयांजलि एवं गुणानुवाद सभा में आचार्य विद्यासागर जी महाराज को याद करते हुए समाज लोगों ने कहा कि आचार्य जी का जीवन भगवान महावीर के आदर्शों का प्रतीक रहा, जो सत्यनिष्ठा, सेवा, और तपस्या से परिपूर्ण था। उन्होंने जीवन भर अपने काम और अपनी दीक्षा से जैन धर्म की मूल भावना का सबसे बड़ा उदाहरण स्थापित किया। आचार्य जी ने सत्यनिष्ठा के साथ अपनी पूरी आयु तक ये सीख दी कि विचारों, शब्दों, और कर्मों की पवित्रता कितनी बड़ी होती है। उन्होंने हमेशा जीवन के सरल होने पर जोर दिया। आचार्य जी के व्यक्तित्व से ही, पूरी दुनिया को जैन धर्म और भगवान महावीर के जीवन से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
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