8 मार्च को प्रदोष के साथ मनाया जाएगा शिवरात्रि महापर्व.…… धन,आरोग्य,ऐश्वर्य के लिए शिवरात्रि पर देवाधिदेव महादेव की आराधना करें : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी
अलीगढ। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में महाशिवरात्रि मनाई जाती है,इस दिन भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का भी प्राकट्य हुआ था। इस बार महाशिवरात्रि पर्व को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।महाशिवरात्रि पर्व को लेकर वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शुक्रवार 8 मार्च को संध्याकाल 09:57 मिनट पर आरंभ होगी,इसका समापन अगले दिन 09 मार्च को संध्याकाल 06:17 मिनट पर होगा। भगवान शिव की पूजा रात्रिकालीन चतुर्दशी तिथि में की जाती है और चतुर्दशी तिथि अगले दिन सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो रही है,ऐसे में इस बार महाशिवरात्रि पर्व शुक्रवार को ही मनाया जाएगा।
स्वामी जी के अनुसार महाशिवरात्रि का पूजन निशीथ काल में ही किया जाता है,प्रथम प्रहर का पूजन शुक्रवार सांय 6:25 मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि 9:28 मिनट तक रहेगा।दूसरा प्रहर पूजन 8 मार्च रात्रि 9:28 मिनट से 9 मार्च रात्रि 12:31 मिनट तक रहेगा।वहीं तीसरे प्रहर की पूजा का मुहूर्त 9 मार्च मध्य रात्रि 12:05 मिनट से 12:56 मिनट तक
रहेगा। शिवरात्रि व्रत के महत्त्व को लेकर स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने कहा कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है और जीवन में प्रसन्नता,सुख-संपन्नता आती है। इस बार शिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है, 300 वर्ष बाद महाशिवरात्रि के दिन सुबह 4:45 मिनट से लेकर पूरे दिन शिव योग रहने वाला है। इसके साथ ही सुबह 6:45 मिनट से 10:41 तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस दिन प्रदोष भी है वहीं मकर राशि में मंगल और चंद्रमा की युति हो रही है, जिससे चंद्र मंगल योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही कुंभ राशि में शुक्र, शनि और सूर्य की युति से त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है और मीन राशि में राहु और बुध की युति हो रही है। ऐसे संयोग कई राशियों के जीवन में खुशहाली लाएंगे।
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