पृथ्वीराज चौहान भारतीय संस्कृति और धर्म के ध्वज वाहक मात्र नहीं बल्कि इसकी रक्षा के लिए युद्धरत रहने और शत्रुओं को दर्जनों बार पराजित करने वाले महान योद्धा के रूप में सदियों से भारत की पहचान रहे हैं। गौरी को 16 बार हराकर जिंदा छोड़ना उनके वास्तविक क्षत्रिय चरित्र को उजागर करता है जबकि शत्रु की छलपूर्ण जीत में उनके साथ हुआ व्यवहार शत्रु की निकृष्टतम सोच को दर्शाता है।
उक्त बातें पृथ्वीराज चौहान की 866 वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता विवेकशील राघव ने कहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक सुरेशप्रताप गांधी ने की तथा संचालन युवा नेता नागेन्द्र सिसौदिया ने किया।
कार्यक्रम के दौरान पृथ्वीराज चौहान के चित्र पर दीप जलाकर एवं पुष्पाहार चढ़ाकर समस्त अतिथियों ने महानायक का स्मरण किया।
इस दौरान प्रमुख रूप से देवेंद्र दीक्षित शूल, श्रीनिवास यादव, विश्राम सिंह यादव, सौरभ पुंढीर, करन सिसौदिया, गौरव ठाकुर, सिद्धार्थ ठाकुर, गोलू ठाकुर, प्रशांत ठाकुर, पुनीत ठाकुर, पवन ठाकुर, शिवम ठाकुर पंकज यादव, नरेंद्र सिंह, आदि उपस्थित रहे।
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