हास्य दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य एवं सांस्कृतिक संस्था ब्रज कला केंद्र [हाथरस ब्रांच] द्वारा श्री राधा कृष्ण कृपा भवन, आगरा रोड पर भव्य काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आशु कवि अनिल बोहरे ने की—
“हँसी के दो बोल जो दिल से निकल जाते हैं,
सूने से माहौल में भी रंग भर जाते हैं।”
कार्यक्रम का संचालन चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा किया गया—
“मुस्कान अगर हो साथ तो सफर आसान हो जाता है,
हास्य का छोटा सा पल भी जीवन महान बना जाता है।”
कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि जो कवि अपने काव्य पाठ या संदेश से सर्वाधिक हास्य उत्पन्न करेगा, उसे सम्मानित किया जाएगा। इस क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभु दयाल दीक्षित ‘प्रभु’ ने अपनी प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर प्रथम स्थान प्राप्त किया—
“हँसी वो चिंगारी है जो ग़म को जला देती है,
और मुस्कान वो दौलत है जो हर दिल को भा लेती है।”
अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा उन्हें पीत वस्त्र, माल्यार्पण एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इसी दौरान ज्ञात हुआ कि प्रभु जी का जन्मदिन भी है, जिस पर उपस्थित सभी साहित्यकारों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
कार्यक्रम में कवि रोशन लाल वर्मा—
“हँसी के बिना जीवन सूना लगता है,
मुस्कुराता चेहरा ही सबसे अच्छा लगता है।”
गफिन स्वामी—
“जो हँसना जान गया, वो हर ग़म से जीत गया,
जीवन की हर मुश्किल को हँसकर ही जीत गया।”
तथा प्रभु दयाल दीक्षित ‘प्रभु’ ने हास्य एवं संदेशपूर्ण कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को हँसी से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर डॉ. सुनीता उपाध्याय (प्रधानाचार्य), पं. अविनाश चंद्र पचौरी, जीवन लाल शर्मा, हरी शंकर वर्मा, जय शंकर पाराशर, कपिल नरूला, उपाध्याय पीयूष अग्निहोत्री, राजेंद्र ‘राजू’ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि
“हँसी जीवन का सबसे सरल और सशक्त माध्यम है, जो तनाव को दूर कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।”
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