धूमधाम से मनाया गया श्री कृष्ण जन्मोत्सव अधर्म और पाप के खिलाफ मार्गदर्शन करते हैं भगवान श्री कृष्ण : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी
धूमधाम से मनाया गया श्री कृष्ण जन्मोत्सव अधर्म और पाप के खिलाफ मार्गदर्शन करते हैं भगवान श्री कृष्ण : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी
अलीगढ़। आज पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस बार जन्माष्टमी की तिथि को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। 18 और 19 अगस्त को जन्माष्टमी तिथि मनाई गई। अलीगढ़ शहर के वैदिक ज्योतिष संस्थान पर दोनों दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के सानिध्य में आचार्य गौरव शास्त्री,रवि शास्त्री,कपिल शर्मा ने भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा का विधिविधान से मंत्रोच्चार के साथ दूध,दही,घी, शहद,शर्करा पंचामृत से अभिषेक करवाया उसके बाद गुलाबजल, फलोदक, गंधोदक, पुष्पोदक से स्नान करवाया। इत्र चन्दन आदि से कन्हैया के बालस्वरूप प्रतिमा का श्रृंगार कर सुंदर वस्त्र पहनाये। स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि जब रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त होती है तो उसे कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है, विष्णु धर्मोतरपुराण के अनुसार अर्धरात्रि में रोहणी नक्षत्र प्राप्त होने पर कृष्ण जन्माष्टमी होती है। इस समय भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना तीन जन्मों के पापों को नष्ट कर देती है। मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि के रोहणी नक्षत्र से युक्त होने पर बालरुपी चतुर्भुज भगवान कृष्ण अवतरित हुए। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में जब रोहणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी तिथि अर्ध रात्रि में दृश्य होती है तो जन्माष्टमी का मुख्यकाल होता है। स्वामी जी ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि जब जब धरती पर पाप और अधर्म हद से ज्यादा बढ़ा है, भगवान ने धरती पर अवतार लिया है। मथुरा की राजकुमारी देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में भगवान विष्णु ने अवतार लिया। श्री कृष्ण का बचपन गोकुल में माता यशोदा की गोद में बीता। भगवान श्री कृष्ण का जीवन मानव समाज को सीख देता है साथ ही अधर्म और पाप के खिलाफ सही मार्गदर्शन करता है।

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