कस्बा के मोहल्ला भूतेश्वर कॉलोनी स्थित प्राचीन भूतेश्वर मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन शनिवार को कथावाचक आचार्य अनिल महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का बखान किया । उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत, भागवत के पंच प्राण हैं, जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है। वह भव पार हो जाता है। उसे वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती हैं। महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आहान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ । जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते हैं । उन्होंने
भगवान की अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रासलीला का वर्णन करते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है । लेकिन वह भगवान को पराजित नही कर पाया । उसे ही परास्त होना पड़ा है । रासलीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है । गोपी गीत पर बोलते हुए व्यास ने कहा जब तब जीव में अभिमान आता है । भगवान उनसे दूर हो जाता है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ । लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती । यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत ही प्राप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक हैं। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी हैं। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया। उन्होंने कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश हैं। कथा का रसपान करने को श्रद्धालुओं की खासी उमड़ रही है । इस मौके पर हरप्रसाद गोस्वामी, अंगूरी देवी, डॉ विकास चौहान,योगेंद्र कुमार, विनोद गोस्वामी, विनय तिवारी, श्याम उपाध्याय, विनय तिवारी आदि मौजूद रहे।
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