नौरंगाबाद स्थित सेठ गौरी शंकर जी वार्ष्णेय की हवेली में स्थित गोपाल जी मंदिर पर जन कल्याण एवं विश्व कल्याण की भावना से आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ आचार्य पंडित शीलेंद्र दीक्षित ने कहा कि वामन विष्णु के 5 वें तथा त्रेता युग के पहले अवतार थे। यह ऐसे अवतार थे जो मानव शरीर में बौने ब्राह्मण के रुप में प्रकट हुए। भगवान बामन 52 अंगुल का रूप धारण करके प्रकट हुए और राजा बलि के द्वार पर पहुंचे। बलि ने ब्राह्मण समझकर उनका स्वागत सत्कार किया। जब भगवान ने राजा से तीन पग भूमि दान की याचना की। तब राजा बली ने वामन से छोटे रुप में देख कर भूमि दान करने के लिए सहर्ष राजी हो गए थे। लेकिन जिस पर शुक्राचार्य ने काफी मना किया लेकिन वह नहीं माने, और उन्होंने जमीन पग के लिए गंगाजल का संकल्प लिया। तब भगवान ने विशाल रुप धरकर दो पग में सारे लोक नाप दिया। तब राजा बलि को गलती का अहसास हुआ और उन्होंने प्रभु के आगे सिर झुका दिया।
श्री दीक्षित ने कहा कि व्यक्ति मोह माया और आडंबर में लिप्त होता जा रहा है। वह धन कमाने के लालच में रिश्तों नातों को पीछे छोड़ गया है। इस अवसर पर देवेंद्र कुमार वार्ष्णेय दाऊदयाल वार्ष्णेय चेतन शर्मा संजीव शर्मा हरि प्रसाद गोस्वामी प्रवीण वार्ष्णेय संजीव वार्ष्णेय सौरभ वार्ष्णेय कामिनी वार्ष्णेय भावना वार्ष्णेय नमित वार्ष्णेय नेहा वार्ष्णेय नितिन वार्ष्णेय सुकन्या वार्ष्णेय राजीव वार्ष्णेय आदि सनातन धर्म प्रेमियों ने श्रीमद् भागवत महापुराण कथा की सामूहिक आरती का बामन भगवान की पूजा अर्चना की
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