निबंधन विभाग के निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल को पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान व कर्मयोग सेवा संघ ने दिया समर्थन
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन (रजिस्ट्री) विभाग के कार्यों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का अनिश्चितकालीन आंदोलन शनिवार को ग्यारहवें दिन भी जारी रहा।
पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान ने आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों की मांगें न्यायोचित हैं। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों एवं अधिवक्ताओं द्वारा उन्हें एक संयुक्त ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने आश्वासन दिया कि आंदोलनकारियों की मांगों एवं समस्याओं को प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा संबंधित मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाकर समाधान का प्रयास किया जाएगा।
वहीं कर्मयोग सेवा संघ के अध्यक्ष विवेक शील राघव ने भी आंदोलन को समर्थन प्रदान करते हुए कहा कि निबंधन विभाग वर्षों से जनता को सेवाएं प्रदान करता आ रहा है और इससे जुड़े हजारों लोग अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि निजीकरण का निर्णय रोजगार, पारदर्शिता एवं जनहित के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
धरने की अध्यक्षता दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. चौहान (शोला) ने की तथा संचालन रंजीत पौरुष एडवोकेट द्वारा किया गया।
वक्ताओं ने सरकार से निजीकरण संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने एवं सभी संबंधित पक्षों से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की मांग की।
अध्यक्ष डी.के. चौहान (शोला) ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही निजीकरण संबंधी प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो सोमवार से आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी चरण में जिला एवं प्रदेश स्तर पर आंदोलन को तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण से अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों के समक्ष बेरोजगारी का संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही आम नागरिकों को रजिस्ट्री संबंधी कार्यों में अतिरिक्त शुल्क, दलाली एवं अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सरकार को जनहित में इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन के अंत में आंदोलनकारियों ने संकल्प लिया कि जब तक सरकार निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर इसे और अधिक व्यापक एवं निर्णायक बनाया जाएगा।
इस अवसर पर सचिव राजेश बघेल, गौरी शंकर गुप्ता, इन्द्रपाल सिंह यादव, मुरारी लाल शर्मा, रामकुमार यादव, ब्रजेश यादव, महेंद्र सिंह यादव, विपिन कुमार, महेश चन्द्र अंजाना, उदयवीर सिंह, सलीम कुरैशी, प्रियांशु दरगढ़, दीपेश पाठक, आनन्द कुमार सिंह, अनिल कुमार, गिरीश यादव, अवधेश यादव, अजीत चौहान, समीर यादव, ऋषभ शर्मा, राजेश यादव, महेंद्र पाल सगर, महेंद्र यादव सहित अनेक अधिवक्ता एवं आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
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