45 दिनों की अद्भुत पदयात्रा: माता वैष्णो देवी के चरणों में पहुंचे पुरदिल नगर, सिकंदराराऊ के दिनेश शर्मा ‘स्नेही’, अब बाबा बर्फानी का है अगला पड़ाव
पुरदिल नगर के युवा सनातन धर्म प्रेमी एवं समाजसेवी दिनेश शर्मा ‘स्नेही’ ने अपनी अद्भुत आस्था, दृढ़ संकल्प और अटूट इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए आज अपनी 45 दिवसीय पदयात्रा के दौरान माता वैष्णो देवी के पावन दरबार में पहुंचकर दर्शन प्राप्त किए।
ज्ञात हो कि दिनेश स्नेही 10 मई को अपने निवास पुरदिलनगर से नगर भ्रमण एवं नागरिकों के आशीर्वाद के पश्चात अमरनाथ यात्रा लगभग - 1700 किलोमीटर, के लिए पैदल रवाना हुए थे। इस कठिन यात्रा के दौरान उन्होंने अनेक प्रमुख सिद्धपीठों एवं शक्तिपीठों के दर्शन किए, जिनमें कर्णवास, बेलोन, चौडरे वाली देवी, शाकंभरी देवी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैना देवी, चिंतपूर्णी देवी, ज्वाला देवी, नागरकोट (ब्रजेश्वरी देवी), बगलामुखी देवी तथा चामुंडा देवी प्रमुख हैं। इन सभी दिव्य धामों में माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए वे आज माता वैष्णो देवी के श्रीचरणों तक पहुंचे।
यह पहला अवसर नहीं है जब स्नेही ने माता वैष्णो देवी की पैदल यात्रा की हो। इससे पूर्व भी वे लगभग 900 किलोमीटर की पदयात्रा कर माता रानी के दरबार तक पहुंच चुके हैं। उनकी अदम्य साहस, तपस्या, अनुशासन और धर्म के प्रति समर्पण को देखकर पुरदिल नगर एवं आसपास के क्षेत्र के नागरिक गर्व और भावविभोरता का अनुभव कर रहे हैं।
स्नेही की इस यात्रा का अगला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पवित्र अमरनाथ गुफा है, जहां वे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अग्रसर हैं। नगर की माताएं, बहनें, बुजुर्ग एवं युवा वर्ग ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी यह कठिन तपस्वी यात्रा सफल हो तथा वे बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकुशल अपने घर लौटें।
फोन पर हुई बातचीत में स्नेही ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें अनेक कठिनाइयों, प्रतिकूल मौसम, शारीरिक थकान और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका कहना है कि जब उद्देश्य बड़ा हो और आस्था सच्ची हो, तब रास्ते की बाधाएं भी साधना का हिस्सा बन जाती हैं।
श्री स्नेही ने कहा कि उनका शेष जीवन समाज में जागरूकता फैलाने, अच्छी शिक्षा के प्रसार और सनातन संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समर्पित रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपने धर्म, संस्कृति, संस्कार और इतिहास के प्रति जागरूक नहीं करेंगे, तो भविष्य में सनातन परंपरा कमजोर पड़ सकती है। इसलिए युवाओं को अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति जागृत करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आज दीनेश शर्मा ‘स्नेही’ की यह 45 दिवसीय तपस्वी पदयात्रा केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, साहस, संकल्प और सनातन चेतना का ऐसा संदेश बन चुकी है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है। माता वैष्णो देवी के चरणों तक पहुंचने का यह गौरवपूर्ण क्षण पुरदिल नगर के लिए भी गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें उस दिन पर टिकी हैं, जब स्नेही बाबा बर्फानी के पावन दरबार में शीश नवाकर अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा का अगला अध्याय लिखेंगे।
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