निबंधन विभाग के निजीकरण के विरोध में हड़ताल तेरहवें दिन भी धरना जारी, अध्यक्ष डी.के. चौहान 'शोला' को किया गया हाउस अरेस्ट
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन (रजिस्ट्री) विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को तेरहवें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में चल रहे धरना-प्रदर्शन एवं कलमबंद हड़ताल के माध्यम से आंदोलनकारियों ने सरकार के निर्णय के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन के धरना अध्यक्ष एवं दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता डी.के. चौहान 'शोला' को प्रशासन द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने की सूचना से अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त हो गया। बताया गया कि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को निबंधन विभाग के निजीकरण के विरोध में ज्ञापन सौंपना चाहते थे, किन्तु उनके आवास पर ही रोक लगा दी गई। अधिवक्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी निंदा की।
धरना स्थल पर हड़ताल की अध्यक्षता दी बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भारत सिंह कुशवाहा एडवोकेट ने की, जबकि संचालन जय प्रकाश गुप्ता ने किया।
इस दौरान पूर्व ब्लॉक प्रमुख सासनी एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता महेन्द्र सोलंकी आंदोलन स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
महेन्द्र सोलंकी ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि अधिवक्ताओं का ज्ञापन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचाया जाएगा तथा इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा भी इस विषय को राज्यसभा में उठाया जाएगा, जिससे निबंधन विभाग के निजीकरण के विरोध की आवाज प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में गूंजेगी।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक निजीकरण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन एवं कलमबंद हड़ताल निरंतर जारी रहेगी। जिसमें मौजूद रहे सचिव राजेश बघेल, युवराज सिंह,गौरी शंकर गुप्ता, नरेश प्रताप सिंह,मुरारी लाल शर्मा, रामकुमार यादव, महेश चन्द्र अंजाना, उदयवीर सिंह, देवेंद्र दीक्षित शूल, कल्लू सिंह कुशवाह,समीर यादव, रंजीत पौरुष, प्रियांशु दरगढ़, राशिद अहमद, राधेश्याम बघेल, कोमल सिंह, नरेश बघेल, प्रबल प्रताप, ऋषभ शर्मा,आनन्द कुमार सिंह, मुनेश यादव, विनय कुमार, देवेंद्र कुमार संत, यशपाल आदि मौजूद रहे।
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