स्वामी करपात्री जी महाराज को श्रद्धांजली अर्पित कर मनाई करपात्री जयंती धर्म सम्राट का सनातन धर्म रक्षा में रहा है अतुल्यनीय योगदान : स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी
स्वामी करपात्री जी महाराज को श्रद्धांजली अर्पित कर मनाई करपात्री जयंती धर्म सम्राट का सनातन धर्म रक्षा में रहा है अतुल्यनीय योगदान : स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी
अलीगढ़। सनातन धर्म रक्षक एवं गौभक्त पूज्य स्वामी श्री करपात्री जी महाराज जो कि एक संत ही नहीं अपितु समाज के प्रणेता रहे हैं। आज सभी सनातन धर्म प्रेमी उनके द्वारा दिये गए नारों जिनमें धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो जैसे अनेकों अन्य नारों का स्मरण कर उनके पथ का अनुसरण कर रहे हैं। इसी क्रम में अलीगढ़ शहर के स्वर्णजयंती नगर सीजंस अपार्टमेंट स्थित वैदिक ज्योतिष संस्थान कार्यालय पर स्वामी करपात्री जी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में शनिवार को गोष्ठी आयोजित की गयी । जिसमें अनेकों विद्वानों ने महाराज जी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर विचार रखे। प्रातः कालीन बेला में वैदिक ज्योतिष संस्थान कार्यालय पर संस्थान प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज की अध्यक्षता में गोष्ठी आयोजित हुई। जिसमें सभी सम्मानित विद्वानों द्वारा पूज्य स्वामी श्री करपात्री जी महाराज की प्रतिमा का माल्यार्पण कर वेद मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने करपात्री जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धर्मसम्राट, प्रकाण्ड विद्वान, गोवंश रक्षक स्वामी करपात्री जी महाराज का जन्म 1907 में उत्तरप्रदेश राज्य के प्रतापगढ जिले के भटनी गांव में रामनिधि ओझाजी के परिवार में हुआ। स्वामी जी को 8-9 वर्ष की आयु में ही सत्य का ज्ञान हो गया, स्वामी जी महाराज ने ‘सत्य की जय हो, अधर्म का नाश हो । प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो आदि जयघोषों को जन जन तक पहुंचाया। सनातन धर्म के ज्ञान का प्रचार और प्रसार में अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया। आज उनके द्वारा धर्म रक्षा में दिया गया योगदान अतुल्यनीय है। स्वामी जी ने बताया कि स्वामी करपात्री जी महाराज ने तपस्या काल में ही पात्र का त्याग कर दिया था तथा दिन में केवल एक बार ही हाथ की अंजुली में जितना समाये, उतना ही भोजन लेकर वह ग्रहण करते थे इस वजह से उनका नाम करपात्री पड़ा। उपरोक्त चर्चा एवं परिचर्चा के बाद सभी ने गुरु स्तोत्र का पाठ किया। इस अवसर पर आचार्य गौरव शास्त्री, शिवम शास्त्री, संजय नवरत्न, रजनीश वार्ष्णेय, कपिल शर्मा आदि लोगों ने अपने अपने विचार रखकर स्वामी करपात्री जी महाराज को श्रद्धांजली अर्पित की।

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