आत्मशुद्धि का मार्ग है भागवत कथा - धीरेन्द्र ब्रह्मचारी
सिकंदराराऊ ग्राम हुसैनपुर कोडरापुल पर भागवत कथा के द्वितीय दिवस की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई । कथा व्यास पुष्पेन्द्र शास्त्री जी ने कि हमें बहुत ही मुश्किल से यह मानव जीवन मिला है , जीवन का कोई भरोसा नहीं है । इसलिए जितनी भक्ति हरि को भजने में लगा सकते हैं उतना समय ईश्वर की भक्ति में लगाए। कथा व्यास ने कहा कि ज्ञान सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए होता है जो लोग ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, वैसे ही भगवत भक्ति का प्रभाव भी उन्हीं के जीवन में होता है ,जो अपने जीवन के महत्व को समझते हैं और जीवन के इस सार को पकड़ कर अपना कल्याण करवाना चाहते हैं। लेकिन दुर्भाग्य पूर्ण आज कल लोग कथाओं को भी मात्र आनंद का साधन समझने लगे हैं। लेकिन कथा कोई आनंद का साधन न होकर आपकी आत्मशुद्धि का बहुत प्यारा मार्ग है। संसार में सभी मनुष्य सुख पाना चाहते हैं। लेकिन ईश्वर की भक्ति के लिए किसी भी मनुष्य के पास कोई समय नहीं है। लेकिन इस ब्रह्माण्ड में आपके दुखों का मूल कारण कृष्ण का विस्मरण ही है। ईश्वर की भक्ति से ही आप सभी के कष्ट दूर हो सकते है। जो व्यक्ति अपने परमात्मा को भूल गया वो जीवन में कभी सुखी नहीं रह सकता। इस संसार में भाग्यशाली वही है जो किसी भी स्थिति में अपने आराध्य के स्मरण को नहीं भूलता उससे ज्यादा सुखी इस संसार में कोई नहीं है। पुष्पेन्द्र शास्त्री ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की श्रीकृष्ण दुखी है की इस कलयुग के व्यक्ति का कल्याण कैसे हो । कथा में धीरेन्द्र ब्रह्मचारी, हरपाल सिंह यादव, हरेंद्र यादव, तारा यादव, चन्द्रावती यादव, सृष्टि यादव, कामिनी यादव, रामवती, धनवंती, सुरती यादव, रेखा यादव, ऊषा यादव, देवा बघेल, जगदीश यादव, अंकित यादव, विनय यादव, रामवीर चौहान, अमित भारद्वाज, विजय यादव, यशपाल सिंह, टीटू, रामसेवक यादव, सरैया लाल जैन, रामवीर कुशवाहा, नरेन्द्र कश्यप, गोपाल यादव, राजपाल यादव, नरेन्द्र सिंह, कोमल सिंह पुंडीर, यादराम बघेल आदि मौजूद थे।

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