श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जीवों का कल्याण संभव है : खेवेन्द्र सिंह
सिकंदराराऊ शास्त्र, संस्कार एवं सत्संग से जीवों का उद्धार व कल्याण होता है। जीव अपने माता के गर्भ में संकल्प के साथ स्वीकार करता है कि धरती पर जाने के बाद सर्व शक्तिमान परमात्मा को कभी नहीं भूलेंगे लेकिन इस संसारिक माया में उलझकर अपने द्वारा किए गए एकरारनामा और संकल्प को भूल जाता है। उक्त बातें क्षेत्र के गांव नगला मधुकर भैकुरी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा व्यास महाराज पंडित अंजली उपाध्याय ने कही। इस दौरान आचार्य ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि वाल्मिकी जैसे कुख्यात अपराधी प्रवृति के जीव जब प्रतिष्ठित पद को प्राप्त कर सकता हैं, तो इस संसार के हर लोग भी भगवत भजन व सत्संग के जरिए परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। इन्होनें विभिन्न उदाहरणों के द्वारा जगत को जगदीश्वर की प्रतीति व अनुभूति का साधन बताया। संसार की सारी वस्तुएं अंत में यहीं छूट जाती है और केवल सत्कर्म, भजन अथवा धर्म ही साथ जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में धर्मपालन में प्रमाद नहीं करना चाहिए। धर्म के विभिन्न रूपों की व्याख्या करते हुए आचार्य ने कुलधर्म, वर्णधर्म, आश्रम धर्म, दान धर्म, मोक्ष धर्म, स्त्री धर्म एवं भगवद्धर्म पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर जनसत्ता दल के जिला अध्यक्ष खेवेंद्र सिंह जादौन द्वारा कथा व्यास महाराज पंडित अंजली उपाध्याय का पटका ओढ़ाकर तथा फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया । उन्होंने कहा कि कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही जीवों का कल्याण संभव है।

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