श्री कृष्ण जन्म होते ही झूमे जमकर श्रद्धालु
सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव रुदायन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया । इस अवसर पर सभी श्रद्धालु कृष्ण की भक्ति में लीन होकर झूमने लगे। पूरा पंडाल भगवान कृष्ण के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा वाचक विदुषी चंचल किशोरी जी ने कहा कि श्री कृष्ण का जन्म दुष्टों का अंत करने और भक्तों का कल्याण करने के लिए हुआ था। भगवान श्री कृष्ण का जीवन हमें प्रेरणा देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में माया प्रबल हो चुकी है। मनुष्य भगवान को छोड़कर माया के पीछे भाग रहा है। ऐसे में वह बंधन में जगड़ जा रहा है। मानव को अपना जीवन सुधारने के लिए भागवत कथा श्रवण करना चाहिए। उन्होंने भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्म महोत्सव की कथा बड़े ही रोचक तरीके सुनाया। जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि ययाति के बड़े पुत्र यदु हुए। उन्हीं के वंश में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ। भगवान कृष्ण ने संसार को अंधेरे से प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया और अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञानरूपी प्रकाश से दूर किया। भगवान कृष्ण को जब वसुदेव यशोदा मैया के घर लेकर जा रहे थे तो, शेषनाग ने छाया की और गंगा माता ने चरण छुए। कृष्ण को नंदबाबा के घर छोड़कर यशोदा मैया की कन्या को लेकर वापस कंस के कारागृह में आए। कथा में कृष्णोत्सव मनाया गया और पूतना उद्धार की कथा सुनाई गई। कथा में जैसे ही भगवान का जन्म हुआ पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर शिव गोविंद सिंह, धीरज पुंडीर, बिन्नामी, सत्यवान, मलखान सिंह, जामवंत, लक्ष्मण सिंह, अनिल कुमार ,नेत्रपाल सिंह, उदयवीर सिंह, हरिप्रसाद, शंकरलाल, जाकिर अली, प्रशांत, धर्मपाल ,वीरपाल , वीरेश कुमार, ज्वाला सिंह, आशु, डॉ राम सिंह, राजेंद्र ठाकुर, दिनेश सिंह, हरेंद्र कुमार, योगेश कुमार, लोकेश नारायण आदि मौजूद रहे ।

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