हिंदी प्रोत्साहन समिति ने समिति के संरक्षक, सशक्त बेटी सुंदर समाज के संस्थापक व समाजसेवी उदय पुंढीर के जन्मदिवस के अवसर पर बच्चों को फल वितरण एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया । गोष्ठी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त बीडीओ राजपाल सिंह बघेल ने की संचालन देवेंद्र दीक्षित शूल ने किया ।
डॉ सत्येंद्र भारद्वाज की सरस्वती वंदना के पश्चात लखीमपुर खीरी के कवि धीरू वर्मा ने पढ़ा- किस तरह मैं रहा हूं तुम्हारे बिना ।रास्तों को भी देखा नजर फिरते
अब सफर भी कहां है तुम्हारे बिना ।
कवि अवशेष विमल ने पढ़ा- कल्पना से परे हैं तुम्हारे नयन भावना से भरे हैं तुम्हारे नयन।
अलीगढ़ से पधारे कवि प्रदीप चौहान ने पढ़ा- अभी तमन्ना जगी हुई है की सांस भी संदली हुई है। श्रोताओं के आग्रह पर चौहान ने पुनः पढ़ा- हया बिकी है हर एक युग में,
हुजूर चौसर सजी हुई है।
जनाब दौलत अजीब शय है
कहां किसी की सगी हुई है।
अवनीश यादव ने पढ़ा- युगों युगों से चली है होली चलो प्रेम से इसे मनाएं ।
जो अपने हमसे रूठे हैं उन्हें मना कर गले लगाएं ।
प्रमोद विषधर ने पढ़ा- सामाजिक सेवा करें उन्हें मिले सम्मान ।
जैसे को तैसा मिले हरि का यही विधान।
सत्येंद्र भारद्वाज आभाष ने पढ़ा- बांसुरी सुनकर कदम की डालियों के पास दिलबर का ठिकाना ढूंढता है।
वरिष्ठ कवि ओमप्रकाश सिंह ने पढ़ा -यहां मानवता की मंडी हो यहां कोई नहीं पाखंडी हो ।
सत्य शिवम् सब और मिले।
ना कोई झंडा झंडी हो।
प्रसिद्ध कवि देवेंद्र दीक्षित शूल ने पढ़ा-आया है नया दौर नया मन बनाइये । स्वार्थ त्याग राष्ट्र की सेवा में आइये ।
धन कमा कर घर चलाना अच्छा काम है।
पर दूसरों का दिल दुखा, ना धन कमाइए।
गोष्ठी में हिमांशु दीक्षित एडवोकेट, कुलदीप पचौरी , सुरेश जादौन, अजय यादव, हरप्रसाद बघेल, सचिन सैनी, कुमारी मोना शर्मा, अलका दीक्षित की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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