अष्टमी तिथि मनाई जाएगी 11 अक्टूवर ,नवमी और दशमी 12 को….. प्रातः नवमी पूजन कर सांय काल में करें रावण दहन : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज
3 अक्टूबर से भगवती दुर्गा के नौ दिवसीय महापर्व समापन की ओर अग्रसर है। इस बार नवरात्रि तृतीया तिथि के दो दिन होने से एक अतिरिक्त नवरात्रि दिवस मिला लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि में संशय की स्थिति बनी हुई है।कन्या पूजन कब किया जाए इसको लेकर वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख ज्योतिर्विद स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि पंचांग के अनुसार 10 अक्टूवर गुरुवार दोपहर 12:31 मिनट से अष्टमी प्रारंभ हो रही है जो 11अक्टूवर शुक्रवार दोपहर 12:06 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमीं तिथि प्रारम्भ हो जाएगी जो कि 12 अक्टूबर को प्रातः 10:58 मिनट तक रहेगी। निर्णयसिंधु के अनुसार अष्टमी और नवमी उदया तिथि ही ग्राह्य है
"सप्तमीवेधसंयुक्ता यैः कृता तु महाष्टमी,
पुत्रदारधर्नैहीना भ्रमन्तीह पिशाचवत्"
ऐसे में जो लोग अष्टमी पूजन एवं व्रत कर कन्या पूजन करते हैं वह शुक्रवार को ही करें शस्त्र पूजा भी अष्टमी को करें और जिन लोगों को नवमी तिथि का पूजन करना है वह 12 अक्टूबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से पहले पहले कन्या पूजन कर लें।
इस बार नवमी और दशमी तिथि शनिवार को होने से प्रातःकाल में नवमी पूजन कर सांयकालीन बेला में दशमी पूजन और रावण दहन किया जाएगा,वहीं इस दिन शाम को अपराजिता, शमी, शस्त्र पूजन के साथ ही सीमोल्लंघन का भी प्रावधान है।
स्वामी पूर्णानंदपुरी जी के अनुसार नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी के साथ महानिशा की रात भी कहा जाता है। माँ दुर्गा का यज्ञ भी अष्टमी की रात्रि में किया जाता है,इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ साथ कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति कन्या पूजन करता है उसके घर में सुख समृद्धि का वास होता है और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है,वहीं महानवमी पर मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सिद्धिदात्री की पूजा से व्यक्ति को सारी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति रोग मुक्ति और भय मुक्त हो जाता है। महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को व्रत का फल देती हैं।

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