राष्ट्रीय पोषण माह में हुआ कृषि विज्ञान केंद्र पर पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन
सिकंदराराऊ
राष्ट्रीय पोषण माह में शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र पर पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन इफको एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से किया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संतोष सिंह यादव सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता हाथरस तथा विशिष्ट अतिथि मोहित बघेल जिला अध्यक्ष भाजपा पिछड़ा मोर्चा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ ए के सिंह अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र हाथरस द्वारा की गई। इस कार्यक्रम में एक सौ किसान, महिला किसान, एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा भाग लिया गया। अन्य वक्तागण डॉ जगदीश मिश्रा, डॉक्टर सुधीर रावत, डॉ पुष्पा देवी ,पी के शर्मा ,आईपी मलिक मुख्य क्षेत्र प्रबंधक इफको द्वारा विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।
मोहित बघेल एवं संतोष सिंह यादव द्वारा कुछ किसानों को फलदार पौधे वितरित किए गए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वृक्षारोपण एवं पोषण अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है । जानकारी एवं जागरूकता से जन-जन को इसका लाभ मिलेगा। संतुलित आहार एवं शुद्ध पर्यावरण से सभी का स्वास्थ्य बेहतर होगा तथा सुंदर राष्ट्र का निर्माण होगा ।
डॉ पुष्पा देवी वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र ने पोषण के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गर्भवती महिला के लिए प्रोटीन, आयरन, विटामिन एवं खनिज आदि का विशेष महत्व होता है। कैल्शियम की पूर्ति के लिए दूध, मक्खन, चीज , दही, अंजीर, अंगूर तरबूज बाजरा तिल आदि उचित स्रोत है तथा प्रोटीन के लिए मूंगफली, पनीर, अंडा, दूध , अंकुरित दालें , चना आदि उत्तम है। आयरन के लिए अंडा, फल, सब्जी ,गुड , अंजीर, खजूर में भी अच्छे स्रोत हैं। विटामिन डी के लिए सुबह की धूप में बैठना या कार्य करना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 10 से 12 गिलास पानी भी जरूर पीना चाहिए। खून की कमी को रोकने के लिए हरी सब्जी, मेथी, चोलाई, मूली के पत्ते , पालक, सरसों का साग, चने का साग, सहजन, प्याज, सोयाबीन , अंकुरित, दाल , तिल, गुड , खजूर, बादाम आदि का सेवन करना चाहिए। किशोरावस्था में जब शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से होता है तब संतुलित आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आई पी मलिक ने नैनो यूरिया की जानकारी देते हुए बताया कि यह किसानों के लिए बहुत लाभकारी है । इससे कम लागत में अधिक पैदावार होती है। लाने ले जाने में भी सुविधाजनक है। पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है । हवा जमीन पानी शुद्ध रहता है । किसानों की फसल की गुणवत्ता भी अच्छी होती है।
डॉक्टर ए के सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों को हर विषय की तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
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