एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक हृयमन राइट्स के तत्वावधान में द्वितीय प्रांतीय व 114 वाँ मेला श्री दाऊजी महाराज में हुआ विशाल मानव अधिकार जागरूकता सम्मेलन का आयोजन
सनातन और मानव अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, क्योंकि सनातन धर्म के मौलिक सिद्धांतों में मानवीय गरिमा, समानता, न्याय और अहिंसा जैसे मूल्य शामिल हैं। द्वितीय प्रांतीय व 114 वाँ मेला श्री दाऊजी महाराज में विशाल मानव अधिकार जागरूकता सम्मेलन का आयोजन एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक हृयमन राइट्स के तत्वावधान में हुआ जिसमें सनातन संस्कृति और मानव अधिकार विषय पर वक्ताओं ने जनसमूह को जाग्रत किया।
वर्तमान में अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, दिल्ली सरकार एवं राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से सेवानिवृत्त ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि आधुनिक मानवाधिकारों की अवधारणा का आधार बनते हैं। ऋग्वेद से लेकर आधुनिक लेखकों तक, विभिन्न भारतीय परंपराओं में मौलिक अधिकारों का विचार मिलता है, हालांकि कुछ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रथाओं जैसे जाति व्यवस्था ने अधिकारों के उल्लंघन को भी जन्म दिया है।
सनातन धर्म में मानवाधिकारों में अहिंसा का सिद्धांत सभी प्राणियों के प्रति दया और सम्मान सिखाता है, जो मानवाधिकारों के मूल विचार से जुड़ा है। सनातन धर्म समानता और धर्म (नैतिक कर्तव्य) पर जोर देता है, जो सभी मनुष्यों को समान गरिमा और समान व्यवहार का अधिकार प्रदान करता है।
डाइरेक्टर एफआईएमटी एवं एडीएचआर महिला प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा.(डा.) सरोज व्यास ने कहा कि सनातन परंपरा में अधिकार कर्तव्यों से जुड़े होते हैं, और कर्तव्यों का पालन अधिकारों की पूर्ति करता है, जिससे समाज में संतुलन बना रहता है। धर्मग्रंथों में मानव के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लेख मिलता है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देते हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से, जाति व्यवस्था ने सामाजिक पदानुक्रम पैदा किया, जिसने कुछ लोगों के लिए समानता और अन्य मूल अधिकारों के उल्लंघन को जन्म दिया। सती-प्रथा जैसी कुछ पुरानी प्रथाएँ मानवाधिकारों का उल्लंघन करती थीं, लेकिन बाद में सुधार आंदोलनों ने इन्हें समाप्त कर दिया।
विशिष्ट अतिथि एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट पुष्पेंद्र वीर प्रताप सिंह ने कहा कि आधुनिक मानवाधिकारों की अवधारणा भारतीय परंपरा और सनातन धर्म के नैतिक और दार्शनिक मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है। हालांकि, कुछ ऐसी प्रथाएँ भी मौजूद थीं जिन्होंने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया, जिन्हें सुधारवादी आंदोलनों और कानूनों के माध्यम से समाप्त किया गया।
संयोजक प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि सनातन धर्म को मानवाधिकारों के साथ असंगत मानना गलत है, क्योंकि यह समानता, न्याय और सभी प्राणियों के प्रति सम्मान के मूल्यों पर आधारित है। एडीएचआर समाज के विभिन्न प्रकल्पों मे अग्रणी भूमिका में कार्य कर रही हैं।
समन्वयक जिला समाज कल्याण अधिकारी डा. सरिता सिंह ने कहा कि हमारा ध्यान अपने कर्तव्यों पर रहना चाहिए जो समाज को नई दिशा दे। अपने माता पिता की आज्ञा मानकर आगे बढिए। सफल आयोजन के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त करती हूं।
हिंदी दिवस के अवसर पर प्रतिभावान कवित्री उन्नति भारद्धाज ने सरस्वती वंदना कर हिंदी दिवस पर अपनी कविता से खूब तालियां बटोरीं और आयोजक मंडल ने उन्नति भारद्धाज का सम्मान किया।
राष्ट्रीय पदाधिकारी मोहन लाल अग्रवाल, देवेन्द्र गोयल, सत्यनारायण वार्ष्णेय, हिमांशु बिडला की गरिमापूर्ण उपस्थिति रही।
सम्मेलन को जिला अध्यक्ष उपवेश कौशिक, डा. पी.पी.सिंह. खुशी चौधरी, लक्ष्य उपाध्याय, आदि ने संबोधित किया।
सम्मेलन में उपवेश कौशिक, शैलेन्द्र साँवलिया, कमलकान्त दोबराबाल, अमित गर्ग, श्याम वार्ष्णेय, राम वार्ष्णेय, सौरभ सिंघल, डॉ पी पी सिंह, केशव देव अरोरा, मनोज वर्मा, मनोज वार्ष्णेय, आशीष सेंगर, दीपक शर्मा , नरेंद्र मोहन शर्मा,शिव शंकर गुलाटी, उद्धव कृष्ण शर्मा, अनिल अग्रवाल जी तेल वाले, जिला महिला इकाई से जिलाध्यक्ष सोनल अग्रवाल, पूजा वार्ष्णेय,शालनी अग्रवाल, कविता गोयल,चित्रा वार्ष्णेय, नीरू वार्ष्णेय, शशीवाला अग्रवाल, मधुलिका शर्मा, गीता गुप्ता, नेहा अग्रवाल, प्रभा वार्ष्णेय, ईशा, पिंकी वार्ष्णेय,आशू वार्ष्णेय, रूचि गुप्ता,पूजा वार्ष्णेय, रितु जैन,मुक्ति जैन,कासगंज जिलाध्यक्ष सुनील विजय, विजय राठी, वरुण चोला, अमापुर अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता, प्रमोद कुमार गुप्ता, आकाश गुप्ता, भीष्म पाल सिंह, निधौलीकलां अध्यक्ष गगन गुप्ता, अनिल बौहरे, अनिल वार्ष्णेय तेल वाले, रामगोपाल दीक्षित, शिवशंकर गुलाठी,सुरेश चंद्र अग्रवाल, सुरेंद्र वार्ष्णेय, मनोज राया वाले, तरूण पंकज, नितिन वार्ष्णेय, राजेन्द्र नाद चर्तुवेदी, सचिन अग्रवाल, राजीव वार्ष्णेय, योगेश वार्ष्णेय, चंदन वार्ष्णेय,सतेन्द्र सिंह, डौली सिंह, सुरेंद्र केवठ,हिमांशु सेंगर, रितु कौशिक, नेहा शर्मा, प्रिया यादव,स्वेता, श्रुति, ज्योति, रश्मि, मनोरमा आदि सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही।
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