गुनाहों से बचे और इंसान एक रोजा रखे-हाफिज
रमजान के तीसरे जुमे पर नगर की विभिन्न मस्जिदों पर जुमे की नमाज अदा कराई गयी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुूूंमे की नमाज अता कर वतन, कोम ओर इन्सानियत के अमन चौन के लिए अल्लाताला से दुआयें मांगी। जुुमे की नमाज से पहले मस्जिद के इमाम इमरान मुस्तफा ने नमाजियों को समझाया कि रोजादार को चाहिए कि खुदा के डर से अपने रोजा की हिफाजत अमल में लाये यानी कि गुनाहों से बचे और इंसान एक रोजा रखे और परहेजगारी से उसे पूरा करें। तो वह रोजा और वह दिन दोनों उसे इंसान के हक में अल्लाह माफी मांगते है। अल्लाह ंउसे माफ कर दें।
हाफिज साहब ने बताया कि रसूल में फरमाया है कि जो इंसान बुराई नही छोडता अल्ला ताला उसके खाने पीने छोडने से कोई मतलब नही है। उन्होेने फरमाया रोजा एक ढाल है जिसके जरिये दोजख् ’नरक’ की आग से बच सकता है। रोजा खानापीना छोडने का नाम नही बल्कि फिजूल बातों को छोडने का नाम है जब कोई इंसान रोजा रखे तो अपने कानों को

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