फूल डोल मेला में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। संचालन कवि शिवम आजाद ने किया । सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन मेला कमेटी एवं आगुन्तक बन्धुओं द्वारा किया गया । तत्पश्चात कविता की रसधार बही ।
पदम् अलबेला ने सुनाया-
बात मेरी सब मानियो, मैं समझाऊ तोय ।
उससे झगड़ा मत करो, जो तुझसे तगड़ा होय ।
कमलकांत तिवारी ने सुनाया-
होगा तेरा चाँद सा मुखड़ा ।
मुझको प्यार नहीं करना ।
राजेश आर्य ने सुनाया-
राम जी का मंदिर बन गया अवध में ।
अब तो हमारे ब्रजधाम की ही बारी है ।
मणि मूसल ने पढ़ा-
दुष्ट पड़ोसी चीन ने देखो ऐसा काम किया कैसे ।
कोरोना का शूप बनाकर, गर्मागर्म पिया कैसे ।
रुबिया खान ने सुनाया-
नदी से गर किनारों का ये संगम काश हो जाता ।
तो मेरा और तुम्हारा भी अमिट इतिहास हो जाता ।
इनके अतिरिक्त डॉ. अजय अटल, दीपक दिव्यंशु, प्रमोद विषधर,अवशेष विमल,पंकज पण्डा एवं अन्य स्थानीय कवियों ने कविता पाठ किया ।
कस्बे में फूलडोल मेले का हुआ भव्य आयोजन
फूल डोल मेले का आयोजन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन कृष्ण जन्म के उपलक्ष्य में किया जाता है । जिसमें दर्जनों झांकियां भी निकाली जाति हैं। झांकी में आगे माँ काली हाथ में कपाण लेकर चल रहीं थी जिसकी शोभा मन को भा रही थी। मेला प्रोत्साहन समिति एवं हनुमान सेवा समिति के द्वारा सभी झांकियों की प्रस्तुति करने वालों को सम्मानित किया गया ,मेला बहुत भव्य तरीके से सम्पन्न हुआ।
मेला अध्यक्ष द्वारा सभी को पटका पहनाकर प्रतीक चिन्ह देकर मेले में प्रस्तुति देने वालों सम्मानित किया गया इस मौके पर,,सुरेश आर्य,बंटी आर्य,सोनू व्याणी,वरूण राठी,सचिन दीक्षित,अनिल नगरिया,हरीश गोयल,शशी शर्मा ,बोबी जाखेटिया,विन्नी जाखेटिया,गौरव राठी ,आदि मौजूद रहे।
प्रशासन का भरपूर सहयोग रहा । क्षेत्राधिकारी जे एन अस्थाना ,थाना प्रभारी विजय सिंह ,चौकी प्रभारी अरविन्द सिंह, पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
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