स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर नगर पालिका परिषद सिकंदराराऊ द्वारा एक गंगा जमुनी मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन नगर पालिका प्रांगण में हुआ । कवि सम्मेलन की अध्यक्षता चैयरमेन मुशीर कुरैशी ने की तथा संचालन शिवम कुमार आज़ाद ने किया । वहीं कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ कवि देवेंद्र दीक्षित शूल रहे आज़ादी के नायकों एवं सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं शमाँ रोशन करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । आगरा से पधारीं चेतना शर्मा की सरस्वती वंदना एवं कानपुर के शायर नोमन मकनपुरी की नाते पाक के बाद कवियों व शायरों ने देशभक्ति की रचनाओं से समां बांध दिया।
भरतपुर राजस्थान से पधारे कवि जयकुमार जय ने पढ़ा- चले जाओ हल्दीघाटी चाहे कश्मीर की घाटी। सुनाती है अमर गाथा मेरे भारत की ये माटी।
रुबिया खान ने पढ़ा-
मेरा प्यारा हिंदुस्तान ।
ये मेरी जान है हिंदुस्तान ।
वरिष्ठ व सुप्रसिद्ध कवयित्री चेतना शर्मा ने पढ़ा -शहादत ऐसे बेटों की भुलाई जा नहीं सकती।
मिटाना चाहे गर कोई मिटाई जा नहीं सकती।
नोमन अख़्तर मकनपुरी ने पढ़ा-
दो जिस्म और एक जान हैं हिन्दू और मुसलमान ।
इस देश की पहचान है हिन्दू और मुसलमान ।
देवेंद्र दीक्षित शूल ने पढ़ा -आओ अमर शहीदों को हम अपने शीश नवायें। और उनके सपनों जैसा सुंदर, भारत देश बनाएं।
मुजाहिद मकसूदपुरी ने सुनाया-
तू बुलंदी पे जो पहुँचा है तो मग़रूर न हो,
चढ़ते सूरज का निकल जाता है दम शाम के बाद।
वृंदावन के मोहन मोही ने पढ़ा- हिंदू का भगवान है भगवा , हरा रंग अल्ला का जलवा।
इनके अलावा प्रमोद विषधर, शायर काशिफ जमाल,विवेक शील राघव, कुमार शिवसंभव एवं वरिष्ठ शायर मुनीम जी, शम्शुल अहद शम्श, सद्दाम भाई आदि ने भी काव्य पाठ किया। कवि व शायरों ने काफी वर्षों बाद नगर पालिका द्वारा कवि सम्मेलन कराने पर चेयरमैन मुशीर कुरैशी का सम्मान किया वहीं चेयरमैन व सभासदों ने सभी कवियों का शायरों का भरपूर सम्मान किया
इस अवसर पर दुर्गेश पंडित जी, अरविंद यादव, महेश यादव,परमानंद सविता, दिलीप गुप्ता, ठा. विजय प्रताप, अलाउद्दीन, सकलेन, आदि सैकड़ो श्रोताओं ने काव्य रसपान किया
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