क्षेत्र में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और समय पर समुचित उपचार के अभाव में हो रही मौतों को लेकर सिकंदराराऊ ट्रॉमा सेंटर को सुचारू करने के लिए चल रहा लंबा संघर्ष अब रंग लाता दिखाई दे रहा है। 9 वर्षों से अधर में लटका यह ट्रॉमा सेंटर अब सक्रिय होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुका है।
गौरतलब है कि 24 मार्च 2015 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर में ट्रॉमा सेंटर का डॉ राकेश सिंह राना द्वारा शिलान्यास किया गया था। भवन निर्माण लगभग दो वर्षों में पूर्ण हो गया था, किंतु विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण यह ट्रामा सेंटर पूर्ण रूप से संचालित नहीं हो सका। परिणाम स्वरूप, गंभीर रूप से घायल मरीजों को अलीगढ़, आगरा या अन्य जनपदों के लिए रेफर करना पड़ता था, जिससे उपचार में देरी होती थी।
पूर्व विधान परिषद सदस्य डॉ. राकेश सिंह राना ने इस मुद्दे को जनहित से जुड़ा बताते हुए हाल ही में व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया। 16 जनवरी से 16 फरवरी 2026 तक चले इस अभियान के दौरान वे स्वयं लगभग 70–80 गांवों में पहुंचे और लोगों को ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता के प्रति जागरूक किया। अभियान के अंतर्गत हजारों नागरिकों ने हस्ताक्षर कर केंद्र को शीघ्र शुरू कराने की मांग की।
जनदबाव और बढ़ती मांग के बीच जिलाधिकारी, हाथरस ने हाल के दिनों में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ट्रॉमा सेंटर में एनेस्थेटिक डॉक्टर और एक सर्जन की नियुक्ति कर दी गई है। साथ ही, दान में प्राप्त एक्स-रे मशीन के संचालन के लिए टेक्नीशियन की भी तैनाती सुनिश्चित की गई है। इन नियुक्तियों के बाद केंद्र में ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो गई और पिछली कुछ दिनों में सर्जरी भी हुई, जिलाधिकारी द्वारा एक ब्लड बैंक भी ट्रॉमा सेंटर पर बनाने की घोषणा हुई है।
डॉ. राकेश सिंह राना ने जिलाधिकारी द्वारा संवेदनशीलता को दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे जनभावनाओं का सम्मान बताया। वहीं, स्थानीय नागरिकों में भी इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
इस संबंध में डॉ. राकेश सिंह राना ने बताया कि हस्ताक्षर अभियान के अंतर्गत एकत्रित हस्ताक्षरों के साथ वे महामहिम राज्यपाल को पत्र सौंपेंगे जिससे कि महामहिम उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित करे कि ट्रॉमा सेंटर में पूर्णतः संचालित कराने के लिए जैसे कि आईसीयू की व्यवस्था, रेडियोलोजिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक मशीनें आदि समस्त मानकों को पूरा कराए, ताकि क्षेत्रवासियों को 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिल सके।
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