अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में जिला शिक्षा एंव प्रशिक्षण संस्थान (डायट) हाथरस में एक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन महिला सशक्तिकरण एवं विधिक जागरूकता के विषय पर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की सचिव अनु चौधरी की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें डायट की प्राचार्या उप शिक्षा निदेशक डा. निशा अस्थाना, प्रवक्ता, डा. सरिता वर्मा, डा. कृष्णगोपाल, डा. चरनजीत, डा. अमितराय एवं डा. कुलदीप एंव डायट संस्थान के समस्त अध्यापक, पराविधिक स्वयं सेवक साहब सिंह, मनू दीक्षित एवं वैष्णो देवी आदि की उपस्थिति में शिविर में सचिव द्वारा उपस्थित छात्र छात्राओं को जानकारी देते बताया कि भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को ‘‘अधिकार, न्याय, कार्यवाई, सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए” विषय के तहत मना रहा है। यह दिवस महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने, न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने और विश्व स्तर पर लैंगिक समानता की दिशा में तेजी लाने के लिए कार्यक्रम और चर्चाऐं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और नागरिक समाज को एक साथ लाकर महिलाओं के अधिकारों और भागीदारी का समर्थन करने वाली नीतियों और पहलों के साथ महिलाओं के अधिकारों को और सशक्त बनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किय जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है। अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में हम आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए। नारी इस तरह से भी सम्माननीय है कि विवाह पश्चात तो महिलाओं पर और भी भारी जिम्मेदारियां आ जाती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं के सम्बन्ध में जानकारी देते हुये कहा कि कन्या भूण हत्या एक अपराध है, जिसमें भूण हत्या कराने वाला एवं करने वाला दोनो ही दोषी है, जिसके लिये कानून में दण्ड का प्राविधान है। उन्होने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डालते हुये बताया कि जिला प्राधिकरण का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति पैसे के अभाव में न्याय पाने से वंचित न रह जाये। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में एक्ट में वर्णित श्रेणी के व्यक्तियों द्वारा विधिक सहायता के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र देने पर प्राधिकरण द्वारा जाॅच उपरान्त निःशुल्क अधिवक्ता से परामर्श हेतु आदेश दिया जाता है।
प्राचार्या, उप शिक्षा निदेशक डा. निशा अस्थाना ने शिक्षा के अधिकार पर जानकारी देते हुये कहा कि शिक्षा का अधिकार संविधान में दिया हुआ है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपने बच्चों को शिक्षित करना है, इसमें 6 से 14 की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा देने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2010 को केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया। इसके तहत में सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षा का अधिकार कानून पर अपनी मोहर लगाते हुए पूरे देश में लागू करने का आदेश दिया। इस अधिनियम के पारित होने से देश के हर बच्चे को शिक्षा पाने का सवैंधानिक अधिकार मिला। इस कानून के तहत देश के हर 6 साल से 14 साल के बच्चे को मुफ्त शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार होगा। हर बच्चा पहली से आठवीं तक मुफ्त और अनिवार्य रूप से पढ़ेगा। सभी बच्चों को अपने आस-पास के स्कूल में दाखिला लेने का अधिकार होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कानून निजी स्कूलों पर भी लागू होगा। शिक्षा के अधिकार के तहत राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके राज्य में बच्चों को निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा प्राप्त हो सके। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ स्कूलों में अन्य अनिवार्य सुविधाएं जैसे पेयजल की सुविधा, खेलकूद की सामग्री, खेल का मैदान भी दी जाएं।
पराविधिक स्वयं सेवक साहब सिंह एवं मनु दीक्षित ने अपने-अपने वक्तव्य में नारी शक्ति एवं दिनांक 14.03.2026 को आयोजित होने वाली लोक अदालत के सम्बन्ध में जानकारी दी।
विधिक साक्षरता शिविर का संचालन डा. सरिता वर्मा द्वारा किया गया। शिविर का संचालन करते हुये उन्होंने बताया कि कानून का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए शिविर में प्राप्त जानकारियों का लाभ उठायें। इस अवसर पर काफी संख्या में छात्र छात्रायें उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त छात्रों द्वारा कलाॅ प्रतियोगिता में भाग लिया गया, जिनमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को पुरस्कार दिये गये।
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