काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है रास:सुभाष दीक्षित

 काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है रास:सुभाष दीक्षित

सिकंदराराऊ:

 रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है लेकिन वह भगवान को पराजित नही कर पाया उसे ही परास्त होना पड़ा है। रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है ।

उक्त बातें भागवत आचार्य पंडित सुभाष दीक्षित ने भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए कहीं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत ही प्राप्त हो जाती है।

कथा में पधारे राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त डॉ सुभाष चंद्र शर्मा ने व्यासपीठ की पूजा अर्चना की। इससे पूर्व बांके बिहारी मन्दिर से श्री कृष्ण की बारात प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गो से होती हुई श्री राधा कृष्ण मन्दिर बगिया बाराहसैनी के प्रांगण में संपन्न हुई। जिसका स्वागत जगह जगह पर हुआ। 

इस मौके पर चेतन शर्मा, बबलू सिसौदिया, प्रकाश गुप्ता, दीपक गुप्ता, संतोष गुप्ता, सुशील गुप्ता, अरविंद गुप्ता , अरविंद शर्मा, सुभाषचंद्र शर्मा, योगेश उपाध्याय, मीरा माहेश्वरी, राधा गुप्ता, खुशबू गुप्ता, हर्षित देव चतुर्वेदी, अभिषेक पंडित, शशिवाला वार्ष्णेय, अनीता गुप्ता, उमंग शर्मा, बृजबिहारी कौशिक, बुद्धसेन शर्मा, कुशाग्र शर्मा, अशोक गुप्ता, दीपक गुप्ता, पंकज गुप्ता, आकाश गुप्ता, राहुल गुप्ता, शौर्य गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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