रूकमणी विवाह प्रशंग सुन भावविभोर हुए श्रोता भगवान श्रीकृष्ण-राधा के स्वरूपों की झांकी ने सभी का मनमोहा

 रूकमणी विवाह प्रशंग सुन भावविभोर हुए श्रोता

भगवान श्रीकृष्ण-राधा के स्वरूपों की झांकी ने सभी का मनमोहा

अलीगंज- नगर के दयाल गार्ड में बीते चार दिनों से चल रही श्रीमद भागवत कथा में रविवार को रूकमणी-श्रीकृष्ण विवाह प्रशंग का वर्णन भागवताचार्य पंण्डित जयप्रकाश शास्त्री ने सुनाया। विवाह का प्रशंग सुन मौजूद महिला, पुरूष श्रोता भाव विभोर हो गए। वहीं भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा के स्वरूपों में सजे कलाकारों ने भक्ति गीतों पर नृत्य प्रस्तुत कर पाण्डाल में मौजूद लोेगों को भक्तिमय बना दिया। 

भागवताचार्य पंण्डित जयप्रकाश शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा हम सभी को सुनना चाहिए। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ, लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। 

अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इसमें कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है, लेकिन वह भगवान को पराजित नहीं कर पाया उसे ही परास्त होना पड़ा है। उन्होंने कहा जब तब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाते है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं, उसे दर्शन देते है।

इस मौके पर रामनिवास गुप्ता, रजनेश गुप्ता, मनोज गुप्ता, राजेश गुप्ता, धीरेन्द्र गुप्ता, सत्यवीर गुप्ता, सूर्यकांत गुप्ता, गोविन्द गुप्ता, अमित गुप्ता, हिमांशु गुप्ता, प्रेम गुप्ता, सागर गुप्ता, मेघ सिंह शाक्य, सत्यभान गुपता, शेखर गुप्ता, सर्वेश गुप्ता सहित बडी संख्या में धर्मप्रेमी मौजूद रहे।

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