एटा डिपो की बस जलकर हुई खाक
एटा/अलीगढ़। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में एटा डिपो आये दिन सुर्ख़ियों में रहता है ड्राइवर कंडक्टरों को महिनेदारी पर गाड़ियां बेचना, निकम्मे कामचोरों को बस अड्डे पर तैनात कर उनके द्वारा प्राइवेट बसें भरवाना? ड्राइवर/कंडक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसों को अपने अनुसार गांव आदि में रोकना, डिपो आदि पर नहीं रोकते है। कुछ समय पहले एटा डिपो की बस शिकोहाबाद डिपो से बस चोरी हो गई थी। मिली तो बैटरी आदि गायब मिली, ऐसी घनाये तो एटा डिपो में आम बात हो गई है जिसका पूरा सरंक्षण ए आर एम का मिला हुआ है। बसों के रख रखाव की बात करें तो सबकी आँखों के सामने आ चुका है। सालों पुरानी कण्डम बसों में सवारियां ढोई जा रही है। जिन कवाड़ा बसों में बैठकर सवारियां सफर करती है वे सोचने पर मजबूर हो जाती है की सलामत गन्तव्य तक पहुँच जायेंगे या नहीं..? एटा से दिल्ली जा रही सवारियों से भरी बस अलीगढ़ जनपद के गभाना के पास एटा डिपो की बस यूपी 87 टी 1996 धू-धू कर जल गई। सवारियां सकुशल गाड़ी से उत्तर गई। ये घटना कोई नई नहीं है इससे पहले 1-2 महीने पहले भी एटा डिपो की बस सिकन्दराराऊ के पास जल गई थी। इसे आप क्या कहेंगे विभाग की लापरवाही ही कहेंगे या भृष्टाचारियों की कमी को बढ़ावा देगीं। ए आर एम अपनी नाकामियों को आयेदिन छिपा रहे है। डिपो राम भरोसे चल रहा है।

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