हाथरस ।
ग्रीष्म ऋतु के दृष्टिगत गौशालाओं में संरक्षित गौवंश हेतु व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किए जाने के उद्वेश्य से जिलाधिकारी अतुल वत्स ने विकास खण्ड हाथरस में संचालित वृहद गौ संरक्षण केन्द्र पुन्नैर का निरीक्षण कर
नर, मादा तथा छोटे बछड़ों को अलग अलग शेड में रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गौशाला में संरक्षित गोवंश के लिए पेयजल की उपलब्धता, टीन शेड की स्थिति, हरे चारे एवं भूसे, दाना/चोकर आदि की व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया तथा वायो गैस संयन्त्र संस्थान के संचालन के सम्बन्ध में जानकारी की। उन्होंने मौके पर उपलब्ध केयर टेकर उपस्थिति पंजिका, स्टॉक पंजिका, सामान्य उपस्थिति पंजिका तथा पशु चिकित्सक विजिट पंजिका का निरीक्षण करते हुए अभिलेखों के समुचित रख-रखाव के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि गौशाला में ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव से गौवंश को सुरक्षित रखने हेतु पर्याप्त छायादार स्थान, स्वच्छ पेयजल एवं संतुलित आहार की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने गौवंश हेतु तालाब की व्यवस्था करने तथा सीसी टीवी कैमरों को जिला मुख्यालय कंट्रोल रूम से कनेक्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद में संचालित सभी स्थाई एवं अस्थाई गौशालाओं में संरक्षित गोवंश का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रत्येक गोवंश की शत-प्रतिशत ईयर टैगिंग कराते हुए उसका अभिलेखीकरण पूर्ण किया जाए, जिससे निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि गौशालाओं के निरीक्षण के दौरान भ्रमण पंजिका में अनिवार्य रूप से हस्ताक्षर अंकित किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट रूप से अभिलेखित रहे कि किस अधिकारी द्वारा कब निरीक्षण किया गया है।
गौ-शाला में संरक्षित किये गये गौ-वंश एवं की गई व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी करने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने अवगत कराया कि गौ आश्रय स्थल में कुल 380 गौवंश संरक्षित है, जिसमें 80 नर एवं 300 मादा गौवंश संरक्षित है। गौ आश्रय स्थल में कुल 09 केयर टेकर कार्य करते है, जिसमें 07 दिन व 02 रात्रिकालीन केयर टेकर है। प्रत्येक केयर टैंकर को रू0 6000/- प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है। गौशाला में कुल 04 टीन शेड है जिनमें 04 चरही एवं 03 पानी की चरही है। गौशाला में 413 कुं० भूसा, 07 कुं० चोकर/चूनी एवं 10 कि0ग्रा0 नमक संरक्षित है। गौ आश्रय स्थल में गौवंश की सुरक्षा हेतु 04 सी०सी०टी०वी० कैमरा क्रियाशील है, जिनके द्वारा संरक्षित गौवंशों की निरन्तर निगरानी की जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 54,200 रू० की गोबर बिक्री हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एस०एफ०सी० पूलिंग से कुल 4,86,000 रू0 पूल की गई है। संरक्षित गौवंशों के भरण-पोषण हेतु गौ आश्रय स्थल में 20 बीघा में ज्वार की बुबाई की गई है। गौ आश्रय स्थल से सम्बद्ध एवं अन्य गोचर भूमि पर हरा चारा उत्पादन की योजनान्तर्गत वृहद गौ संरक्षण केन्द्र पुन्नेर में चारा उत्पादन किये जाने हेतु प्रति हैक्टेयर 22,000.00/- की दर से गौ आश्रय स्थल से सम्बद्ध गोचर भूमि कुल 4 है० हेतु रू0 88,000.00/- की धनराशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी सदर, परियोजना निदेशक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, ग्राम प्रधान, चिकित्सक, केयर टेकर आदि उपस्थित रहे।
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