यूजीसी के इक्विटी एक्ट के विरोध में वाहन रैली निकालकर एडीएम को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन

हाथरस। 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) लागू रेगुलेशन एक्ट में नए नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गहरी असमानता और भेद भाव उत्पन्न करने वाले हैं। यह कानून अपने वर्तमान स्वरूप में एकपक्षीय है,जिसके कारण छात्रों का शैक्षणिक और व्यवसायिक भविष्य बाधित होने की स्थिति बन गई है। शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होना चाहिए,न कि अगड़ा -पिछड़ा के आधार पर किसी एक वर्ग के अधिकारों का हनन कर दूसरे वर्ग के लिए भूमि तैयार करना। भारत का संविधान समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है। ऐसे में किसी भी समिति का उद्देश्य संतुलित, बहुवर्गीय और समावेशी होना है। झूठी शिकायत पर निर्णय छात्रों के अधिकारो और विश्वास को प्रभावित करते हैं।

हृयूमन राइट्स डिफेंडर प्रवीन वार्ष्णेय के नेतृत्व में एक मोटरसाइकिल रैली बागला कालेज से निकालकर बाजारों में भ्रमण करते हुए नारेबाजी की  यूजीसी कानून को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी की। यूजीसी कानून को रद्द करो-रद्द करों,जिस सर्वण का खून ना खोला-खून नहीं वह पानी है,अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है,मोदी सरकार शर्म करों-शर्म करों जैसे तीखे नारे लगाए।यबाइक रैली के माध्यम से सर्वण समाज को यूजीसी कानून के बारे में बता कर जागरूक किया। यूजीसी कानून के विरोध में  बाइक रैली हाथरस के बागला इंटर कॉलेज से शुरू होकर शहर में भ्रमण करती हुई जिला मुख्यालय पहुंची। जहां जिलाधिकारी की उपस्थिति में अपर जिलाधिकारी बसंत लाल अग्रवाल (आईएएस)को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देते हुए मांग की किUGC के इस एकपक्षीय एवं सवर्ण छात्रों के विरुद्ध प्रभाव डालने वाले काले कानून। ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। नीति निर्धारण समितियों में सभी सामाजिक वर्गों का संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व किया जाए । छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं राज्य सरकारों से व्यापक संवाद के बाद ही कोई नई नीति लागू की जाए। निर्णय समितियों में सामाजिक विविधता का अभाव नीति को एकपक्षीय,पक्षपातपूर्ण और अविश्वसनीय बनाता है। यूजीसी के प्रस्तावित काले कानून ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल वापस लिया जाए। आपका नारा सबका साथ- सबका विकास इस निर्णय मे कहीं दिखाई नहीं देता। कोई भी झूठी शिकायत छात्र के केरियर को बर्बाद करने के लिए पर्याप्त है।झूठी शिकायत पर कार्यवाही का प्रावधान क्यों नहीं है। देश की संसद, सरकारें, राजनीतिक दल और राजनैतिक लोग केवल अपने फायदे के लिए देश के नागरिकों को जातिगत व्यवस्था में बाटने का कार्य करते हैं। भेदभाव पूर्ण काले कानून UGC को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर छात्रों और देश के नागरिकों को राहत प्रदान की जाये। 

    इस अवसर पर कमलकांत दोबरावाल, अनिल वार्ष्णेय, शैलेन्द्र सांवलिया, मनीष वार्ष्णेय, कपिल गुप्ता, अमन बंसल, सौरभ अग्रवाल, ललतेश गुप्ता, सुरेश चंद्र अग्रवाल, रवि गुप्ता, डा.रोहतास पाराशर, कुलदीप वार्ष्णेय, मनीष अग्रवाल, बसंत चौधरी, सुबोध अग्रवाल, ओमवीर पचौरी, गोपाल अग्रवाल, आंनद मोहन तिवारी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सौरभ अग्रवाल, अमर शर्मा, आशीष उपाध्याय, मनोज टालीबाल, अमित बंसल उद्धव कृष्ण शर्मा,निपुण सिंघल, भानु प्रकाश वार्ष्णेय, बसंत चौधरी, बाल प्रकाश वार्ष्णेय, राजेश वार्ष्णेय, कुलदीप शर्मा, श्याम चौधरी, अभिषेक, आलोक वार्ष्णेय, महेश चंद्र अग्रवाल, हीरेंद्र वार्ष्णेय, योगेश वार्ष्णेय, चंदन वार्ष्णेय, वासुदेव वार्ष्णेय, गौरांग वार्ष्णेय आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।



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