जनपद में जल शक्ति अभियान कैच द रेन-2025 के अन्तर्गत जल संचय, जन भागीदारी 2.0 विषयक बैठक विकास भवन सभागार में आयोजित की गई।
बैठक में उक्त कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आ रही विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई । सर्वप्रथम सम्बन्धित अधिकारियों की उपस्थिति सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करते हुए दीपक कुमार, सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई को सम्बन्धित विभागों द्वारा पोर्टल पर पूर्ण किये गये कार्यों की फीडिंग में आ रही समस्याओं को त्वरित गति से दूर करने हेतु अपेक्षा की गई। दीपक कुमार, सहायक अभियन्ता लघु सिंचाई द्वारा बैठक में उपस्थित सभी से सम्बन्धित कार्यों को पोर्टल पर फीडिंग में आ रही समस्याओं के सम्बन्ध में जानकारी की गई और बताया गया कि यदि किसी का आईडी पासवर्ड जारी किया जाना शेष हो अथवा कार्य न कर रहा हो तो उक्त समस्या का समाधान कार्याालय में सम्बन्धित पटल सहायक से तुरन्त सक्रिय कराने का कष्ट करें।
बैठक में उपस्थित शाकिब आजमी, भूजल वैज्ञानिक, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड लखनऊ द्वारा प्रस्तुत पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि पूर्व में जलशक्ति अभियान, कैच द रैन कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा क्रियान्वित कराया जा रहा था। उक्त कार्यक्रम में जन-मानस की समुचित रूप से भागीदारी हेतु कार्यक्रम को ’’जल संचय जन भागीदारी’’ 2.0 के रूप में क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे आम जन-मानस को जल के संचयन, संरक्षण एवं भूजल रिचार्ज के कार्यों में पूर्ण रूप से जोड़कर अधिक से अधिक भू जल रिचार्ज कार्यक्रम को सार्थक किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि उक्त कार्यक्रम से सम्बन्धित कार्यों को सम्पादित करने हेतु 2.0 में मनरेगा योजना को भी सम्मलित किया गया है। जिसके अन्तर्गत अतिदोहित एवं क्रिटिकल विकास खण्ड में 65 प्रतिशत, सेमी क्रिटिकल विकास खण्ड में 40 प्रतिशत एवं अन्य विकास खण्ड में 30 प्रतिशत जल संचयन, संरक्षण के स्ट्रक्चर तैयार किये जा सकेंगे। उक्त कार्यों को पूर्ण करने हेतु तीन प्रकार से उपलब्ध धनराशि यथा शासकीय धनराशि, सीएसआर एवं विभिन्न एनजीओ द्वारा कार्य सम्पादित कराये जा रहे हैं। उक्त से सम्बन्धित धनराशि के उपलब्ध स्रोतो से विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत कराये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से अवगत कराया गया।
बैठक में भूगर्भ जल से सम्बन्धित एक्यूफर के सम्बन्ध में चर्चा के दौरान बताया गया कि 350 मीटर तक भूजल के सम्बन्ध में अध्ययन करने पर परिलक्षित हुआ है कि जनपद में दो एक्यूफर हैं। प्रथम एक्यूफर लगभग 100 मीटर तक एवं द्वितीय एक्यूफर के अन्तर्गत उससे अधिक गहराई में स्थित जलश्रोत आता है। बताया गया कि प्रथम एक्यूफर में उपस्थित पानी हीे पीने के उपयोग में लाया जाता है। इसी एक्यूफर को हम विभिन्न जल संचयन योजनाओं द्वारा रिचार्ज कर सकते हैं। इससे सम्बन्धित उपस्थित अधिकारीगण द्वारा विभिन्न जानकारी चाही गयीं, जिसके सम्बन्ध में समुचित जानकारी प्रदान की गई।
खण्ड विकास अधिकारी सादाबाद द्वारा विकास खण्ड में खारे पानी की समस्या के सम्बन्ध में अवगत कराया गया। उक्त के सम्बन्ध में बैठक में खारे पानी के सम्बन्ध में बताया कि किस एक्यूफर पर किस प्रकार का पानी उपलब्ध है। खारा पानी किस प्रकार बनता है, इसके बारे में भी बताया गया। उक्त जानकारी बैठक में उपस्थित अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत मुरसान एवं सहपऊ द्वारा भी चाही गई।
उपरोक्तानुसार सम्बन्धित विभागों को अवगत कराया गया है कि पूर्व में जनपद में पानी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था, तब जल शक्ति अभियान की कोई आवश्यकता नहीं थी। अब जनपद में पानी का अनावश्यक भूगर्भ जल दोहन होने के कारण जल स्तर काफी गहरा हो गया है। यदि सम्बन्धित विभागों द्वारा रेनवाटर हार्वेस्टिंग, सोकपिट, तालाब, चेकडैम एवं वृक्षारोपण आदि का निर्माण नहीं किया जाता है तो आगामी भविष्य में कठिनाईयों का सामना करना पडेगा। वर्षा जल संचयन के कार्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वर्षा की एक-एक बॅूद को संचयन किया जाना भविष्य के लिए बहुत ही उपयोगी होगा एवं इसकी महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए जनमानस में प्रचार-प्रसार हेतु उचित कदम उठाये जायें। इसी के साथ सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बैठक का समापन किया गया।
बैठक में जनपद हेतु नामित शाकिब आजमी, भूजल वैज्ञानिक, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड लखनऊ एवं अन्य कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारीगण एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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