पंडित राम सिंह को जवाहरलाल नेहरू ने दी थी त्यागी की उपाधि
पंडित राम सिंह का जन्म हाथरस जनपद के गांव कोका में पंडित छेदा लाल के यहां सन 1914 में हुआ था। देश की आजादी के लिए लड़ी जा रही जंग में शामिल होने के लिए इनके सर पर इतना जुनून सवार था कि बेटे की मृत्यु की खबर भी उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने से नहीं रोक सकी पुत्र मोह छोड़कर वह आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए दिल्ली पहुंच गए। जहां पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें त्यागी की उपाधि दी थी। 1942 में मुरसान क्षेत्र के गांव नगला हंसी में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान राम सिंह ने अंग्रेज पुलिस को मुंहतोड़ जवाब दिया। इस दौरान पुलिस द्वारा पंडित राम सिंह के साथ मारपीट की और तीखा प्रहार किया गया था। इससे उनके 19 टांके आये थे । अंग्रेज पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जब उन्हें जेल ले जाया जा रहा था तब सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पूरा स्टेशन पर पंडित राम सिंह से मिलने पहुंचे थे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि रेल प्रशासन को करीब 1 घंटे रेल मार्ग साफ करने में लग गया । उनकी पत्नी कटोरी देवी जब उनसे मिलने जेल पहुंची तो पुलिस ने उन्हें मिलने नहीं दिया। इस घटना से आक्रोशित होकर पंडित जी ने 2 सिपाहियों को जेल में मौत के घाट उतार दिया और जेल तोड़कर भाग गए और करीब एक वर्ष गांव के आसपास छुपते छुपाते रहे और आजादी की लड़ाई लड़ते रहे। इसके बाद आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए वह पंडित गोविंद बल्लभ पंत के साथ लखनऊ पहुंचे थे जहा उन्होंने अंग्रेजों की खूब लाठियां खाई थी।
जब देश को आजादी मिली तो प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद पंत द्वारा उन्हें पीआरडी ब्लॉक ऑर्गेनाइज बनाया गया था। करीब 20 साल की सेवा के बाद पंडित राम सिंह त्यागी सेवानिवृत्त हुए और इसके बाद में जीवन के अंतिम चरणों तक प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय हाथरस केंद्र से जुड़े रहे । उनके पुत्र और पुत्र सहित परिवार के अन्य लोग उनकी वीरगति सुनकर गौरवान्वित होते रहते हैं।
स्वतंत्र सेनानी राम सिंह त्यागी के पुत्र पंडित बनवारी लाल का कहना है कि आज तक उनके परिवार को सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिली है। खंड विकास कार्यालय हाथरस में जरूर स्वतंत्र सेनानी स्मारक पर उनके पिता का नाम दर्ज है । गांव के बाहर उनकी याद में स्वतंत्र सेनानी गेट भी बनवाया गया है। उनकी मांग है कि उनके नाम से गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोला जाना चाहिए। वहीं उनके गांव का नाम पंडित राम सिंह त्यागी के नाम पर रखा जाना चाहिए और कम से कम एक रोडवेज बस का संचालन भी होना चाहिए।


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