कन्या को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे ससुराल व मायका दोनों कुल कलंकित हों: सुनील कौशल जी महाराज
नगर के कासगंज रोड स्थित ममता फार्म हाउस मेंचल रही श्री राम कथा के पंचम दिन पूज्य सुनील कौशल जी के द्वारा मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम जानकी जी के विवाह की मनोहारी कथा का श्रवण कराया गया। लक्ष्मण परशुराम संवाद सुनाया। योगेश शर्मा, वीरेंद्र सिंह राणा विधायक, पूर्व विधायक यशपाल सिंह एवं धर्मपाल सिंह पीलू भईया ब्लॉक प्रमुख हसायन,महेंद्र सिंह सोलंकी उद्योगपति पूर्व ब्लॉक प्रमुख सासनी, श्रीकांत त्रिवेदी द्वारा व्यासजी श्री सुनील कौशल जी का पटका पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य स्वागत किया।
कथा व्यास सुनील कौशल जी महाराज ने बताया कि सीता स्वयंवर पर प्रत्यंचा च़ढ़ाना कोई सरल कार्य नहीं था। राम ने जनकपुर के स्वयंवर में अपनी अदभुत वीरता दिखाई और जिस धनुष को राजा महाराजा हिला नही सकें उस धनुष को उठाकर रामजी ने सीता से विवाह किया। माता सीता ने रामजी के गले में वर माला डालकर उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की बिदाई हुई तब उनके माता-पिता ने उन्हें ससुराल में कैसे रहना है, इसकी सीख दी। प्रत्येक माता-पिता को अपनी पुत्री के विवाह के समय ऐसी ही सीख देनी चाहिए। कन्या को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे ससुराल व मायका दोनों कुल कलंकित हो। माता सीता ने पूरे जीवन अपने माता पिता की सीख का पालन किया और जीवन में कष्ट सहन करते हुए भी कोई अनुचित कार्य नहीं किया।
कथा व्यास ने कहा कि महर्षि गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या की सुंदरता को देख इन्द्र ने अपना वेश बदलकर व्यभिचार किया। इन्द्र के इस कृत्य का रामकथा में उल्लेख में मिलता है, इस कृत्य के कारण इंद्र का सम्मान कम हुआ। प्रभु रामजी ने विश्वामित्र की प्रेरणा से गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंचकर शिला बनी देवी अहिल्या का उ़द्धार किया। उन्होंने राम जानकी विवाह के समय हुए राजा दशरथ के तीनों अन्य पुत्रों लक्ष्मण ,भरत, शत्रुधन के विवाह का भी श्रवण कराया। राजा दशरथ के चारों पुत्र संस्कारी थे। कुल की श्रेष्ठता एवं चारों के संस्कारों से राजा जनक जो सीता सहित चार पुत्रियों के पिता थे, उन्होंने उर्मिला माण्डवी एवं श्रुमकिर्ती का विवाह क्रमश लक्ष्मण, भरत, शत्रुधन से किया। अर्थात जो लोग कुल एवं संस्कारों में श्रेष्ठ होते हैं उनके विवाह में ज्यादा बाधा नहीं आती है। पुत्री का सुख चाहने वाले माता-पिता स्वयं ऐसे कुल एवं संस्कारवान परिवारों का चयन करते हैं इसलिये जीवन में श्रेष्ठ आचरण करें।
इस अवसर पर आशीष दीक्षित, मीरा महेश्वरी आरती त्रिवेदी, सतीश चंद्र दुबे, रिंकू शर्मा, दुर्गापाल यादव, राजपाल सिंह, सोनपाल दीक्षित , राकेश शर्मा , ओमप्रकाश दीक्षित, श्रीकांत त्रिवेदी,आचार्य सुभाषचंद्र दीक्षित, गांधी जी, पवन शर्मा श्याम मुरारी शर्मा आदि लोग मौजूद रहे।


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