बूलगढ़ी की घटना में न्यायालय ने किया निष्पक्ष न्याय: निशांत चौहान
आज बहुचर्चित बूलगढ़ी घटना पर न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आज भी आम जनता की सुरक्षा के लिए न्यायालय सजग हैं और न्यायालय निष्पक्षता से बेगुनाहों की गुहार सुनते हैं और किसी भी तरह के दबाव में आए बिना न्यायपूर्ण निर्णय देते हैं।
उक्त बातें श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेश महासचिव निशांत चौहान राष्ट्रवादी ने कासगंज रोड स्थित ममता फार्म पर पत्रकार वार्ता के दौरान कहीं। श्री चौहान ने कहा कि इस मामले में झूठे फंसाए गए तीनों नौजवानों रवि,रामू व लवकुश को बरी करने के लिए न्यायालय एवं प्रदेश सरकार का सर्व समाज हार्दिक आभार व्यक्त करता है और आगे इस मुकदमे में जो भी होगा, उसके भी निष्पक्ष होने की आशा करते हैं । हमारा उस बिटिया के परिवार से कोई द्वेष नहीं है, बल्कि हम तो शुरुआत से ही उसके लिए न्याय चाहते थे, लेकिन अराजक संगठन के जातिवादियों ने इस मुद्दे में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की पूरी कोशिश की, बार बार घटना स्थल पर अपने साथ भीड़ लाकर और लोगों को जाति के नाम पर उकसाकर पुलिस - प्रशासन को उलझाए रखा। जिससे पुलिस को इस घटना की जल्दी छानबीन करने का मौका ही नहीं मिला और उस बिटिया को न्याय मिलने में देरी हुई और दुनिया भर में यह मुद्दा विवाद की वजह बन गया और हाथरस जनपद को पूरे विश्व भर में दागदार किया गया।
श्री चौहान ने कहा कि हम पुलिस प्रशासन व प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि रवि,रामू व लवकुश के परिवार के केस की पैरवी करते हुए घर की सभी पूंजी व जेवरात बिक गए।आखिरकार बेगुनाहों को न्यायालय द्वारा न्याय मिला और हम शुरुआत से बस यही चाहते थे कि जो दोषी हैं , उन्हें सजा मिले । लेकिन किसी बेगुनाह का शोषण ना हो, पर फिर भी एक आपराधिक घटना की आड़ लेकर पूरे सवर्ण समाज को गालियां दी गयीं। हमारी बहन बेटियों के बारे में घिनौनी बातें की गयी और इस मुकदमे में बेवजह कुछ बेगुनाह नौजवानों के नाम लिखवा दिए गए।इसलिए अब पुलिस प्रशासन से हमारा ये सवाल है कि इन बेगुनाह नौजवानों पर जो दाग लगे, इनके परिवार को जो पीड़ा सहनी पड़ी, इनके परिवार को जो धन खर्च करना पड़ा और इतनी बदनामी सहनी पड़ी, उसकी भरपाई कैसे की जाएगी।
इस अवसर पर विप्र समाज के नेता आकाश दीक्षित, गगन चौहान, रामप्रताप सिंह, सचिन पुंढीर, आशु प्रसाद, ललित चौहान, रोहित चौहान आदि लोग उपस्थित रहे।


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