देव दीपावली पर अंतिम चन्द्रग्रहण भारत में रहेगा मान्य : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज

 देव दीपावली पर अंतिम चन्द्रग्रहण भारत में रहेगा मान्य : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज

अलीगढ़। मंगलवार को वर्ष का आखिरी पूर्ण चंद्रग्रहण देखने को मिल रहा है । 25 अक्टूबर को वर्ष के अंतिम सूर्यग्रहण के 15 दिनों के अंतराल पर यह दूसरा ग्रहण होगा भारत में इस चंद्र ग्रहण को देखा जा सकेगा जिसके कारण ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा जो कि ग्रहण प्रारंभ होने के 9 घंटे पहले लगेगा। चंद्र ग्रहण से संबंधित यह जानकारी वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने दी।

शहर के ज्योतिर्विद एवं वैदिक ज्योतिष संस्थान के अध्यक्ष स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली पर्व पर लगने वाला वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लगेगा मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल इस दिन तीसरे भाव में वक्रीय अवस्था में रहेंगे। इसके अलावा चंद्रमा राहु के साथ मौजूद होंगे और सूर्य केतु,शुक्र और बुध के साथ स्थित होंगे। देवगुरु बृहस्पति अपनी स्वयं की राशि मीन और शनिदेव भी अपनी स्वयं की राशि मकर में विराजमान रहेंगे। यह चंद्रग्रहण भारत में पूर्वोत्तर राज्यों में पूर्ण रूप से देखने को मिलेगा। भारत के अलावा यह चंद्रग्रहण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया और पेसिफिक में दिखाई देगा।भारत में यह चंद्रग्रहण शाम होते ही दिखाई देने लगेगा।

स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने चंद्रग्रहण के समयावधि एवं सूतक काल से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य ग्रहण होने पर सूतक काल ग्रहण के शुरू होने से 12 घंटे पहले जबकि चंद्र ग्रहण होने पर 9 घंटे पहले से सूतक शुरू हो जाता है अतः 8 नवंबर को अलीगढ़,मथुरा में सांय 05:30 मिनट से 06:19 मिनट तक रहने वाले इस चन्द्रग्रहण का सूतक प्रातः 08:30 मिनट से आरंभ होकर ग्रहण की समाप्ति के साथ खत्म हो जाएगा। शास्त्रों में सूतक काल को अशुभ माना गया है इसलिए सूतक लगने पर पूजा पाठ,धार्मिक अनुष्ठान और शुभ काम नहीं किए जाते हैं। मंदिर के पट बंद दो जाते हैं परंतु इस दौरान अपने इष्ट देवी देवताओं के नाम का स्मरण करना चाहिए साथ ही ग्रहण के असर को दूर करने के लिए चंद्रमा से जुड़े हुए मंत्रों का जाप करना चाहिए। ग्रहण में न तो खाना पकाया जाता है और न ही खाना खाया जाता है। ग्रहण शुरू होने से पहले यानी सूतक काल प्रभावी होने पर पहले से ही खाने-पीने की चीजों में कुशा को डालकर रखना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद गंगानदी में या गंगाजल युक्त पानी में स्नान कर दान करना चाहिए एवं ग्रहण की समाप्ति पर पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव भी अत्यंत आवश्यक है।

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