भगवान राम जैसा चरित्र इस संसार में पैदा नहीं हुआ: दुर्गेश वशिष्ठ
क्षेत्र के गाँव जिरौली कलां में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन प्रवचन सुनने आसपास के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
कथा व्यास पंडित दुर्गेश वशिष्ठ शास्त्री जी ने कहा कि राम कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है।
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा भक्तों को प्यारी लगती है। जब ज्ञान का स्पर्श होता है तब अहंकार का नाश हो जाता है। श्रीराम में वह अहंकार नहीं था। उन्होंने धनुष उठाया और उनका सीता से विवाह हुआ।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को अपने जीवन में भगवान श्रीराम के आदर्शों व व्यक्तित्व को उतारने की जरूरत है।भगवान हर जगह पूजे जाते है। रामकथा से हर तरह का दुख मिट जाता है।भगवान राम जैसा चरित्र इस संसार में पैदा नहीं हुआ। वह परम उदार, दयालु और मार्ग दर्शक हैं। भगवान राम का नाम उनसे बड़ा है। उनके नाम में इतनी शक्ति है कि अगर सच्ची भक्ति और निष्ठा से पत्थर पर लिखने से पानी तैरने लगता है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहे जाते हैं। सदियों से अभिभावक उनके जैसा बेटा चाहता है। उन्होंने श्रीराम कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि श्रीराम कथा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा सुनने मात्र से ही प्रभु की कृपा मिलती है।
शास्त्री ने कहा कि जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है। राम की कृपा वहीं होती है, जहां उनके भक्त रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु ने ही मानव शरीर बनाया है। लेकिन पुरुषार्थ मानव का धर्म है। बिना परिश्रम के कुछ भी मिलना असंभव है। रामकथा से हर जीव की व्यथा दूर हो जाती है। संसार के सभी जीवों का मंगल रामकथा के श्रवणपान से ही हो जाएगा।


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