नगर के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित सुभाष चंद्र दीक्षित ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रतोत्सव को लेकर हो रही चर्चाओं को लेकर कहा है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रतोत्सव सोमवार 26 अगस्त 2024 को ही सर्वमतेन शुभ है। अतः इसी दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाए। परंतु कुछ निज मतावलंबी विद्वानों एवं धर्माचार्यों द्वारा सनातन धर्म एवं शास्त्रों की मर्यादा का ध्यान न रखते हुए जन्माष्टमी व्रत में भी संशय एवं भ्रम की स्थिति पैदा कर दी गई है जबकि इस वर्ष जन्माष्टमी व्रत उत्सव भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी दिन सोमवार दिनांक 26 अगस्त 2024 को ही सर्वमतेन मान्य रहेगा क्योंकि इस दिन सोमवार अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र एवं सूर्योदय काल से जन्म समय अर्धरात्रि तक अष्टमी तिथि का दुर्लभ योग है। जैसा कि शास्त्र विदित है।
1- रोहिणी संयुतो पोष्या सर्वाघौघ विनाशिनी अर्थात रोहिणी युक्त अष्टमी सभी पापों का विनाश करने वाली है। (हिमाद्री कथन)
2- रोहिण्यामर्ध रात्रि, यदा कृष्णाष्टमी भवेत्। तस्यामभर्यर्चनं शोरेर्हरन्ति पापं त्रिजन्मजम्।। अर्थात अर्ध रात्रि समय रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि सोमवार का सहयोग हो तो तीन जन्म के पापों का शमन होकर शुभ फल प्राप्त होता है।
3- निर्णय सिंधु जेतायां द्वापरे चैव राजन कृतयुगे तथा रोहिणी सहितं चेयं विद्वम्दि: समपोषिता। अर्थात त्रेता, द्वापर ,सतयुग में भी रोहिणी सहित अष्टमी में ही विद्वानों ने उपवास किया था । इस वर्ष यह सभी दुर्लभ योग सोमवार 26 अगस्त 2024 को प्राप्त है। अतः स्मार्त एवं वैष्णव जन एक साथ मिलकर भक्ति एवं श्रद्धा के साथ जन्माष्टमी व्रत हर्षोल्लास सहित संपन्न करें। यही शास्त्र सम्मत एवं सर्वमतेन मान्य करना शुभ रहेगा।
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